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लखनऊ नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव

यूपी के लखनऊ नगर निगम की 12 सदस्यीय कार्यकारिणी के 6 सदस्यों के सेवानिवृत्त होने के बाद रिक्त सीटों पर 22 जून को मतदान होगा।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थानीय निकाय सरकार को मजबूत करने की कवायद शुरू हो गई है। लखनऊ नगर निगम की 12 सदस्यीय कार्यकारिणी के छह सदस्य बीते 1 जून को सेवानिवृत्त (रिटायर) हो चुके हैं। खाली हुई इन छह सीटों पर नए सदस्यों को चुनने के लिए आगामी 22 जून को मतदान होना तय हुआ है। इस चुनावी प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए नगर निगम सदन की एक विशेष बैठक बुलाई गई है। प्रभारी नगर आयुक्त अभिनव रंजन की ओर से इस चुनाव को लेकर आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से लखनऊ नगर निगम (उत्तर प्रदेश) से संबंधित है और यह ताजा प्रशासनिक घटनाक्रम है।

इस बार का मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है क्योंकि जो छह सदस्य रिटायर हुए हैं, उनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों के नेता शामिल हैं। निवर्तमान सदस्यों में भाजपा के भृगुनाथ शुक्ला, अनुराग मिश्रा, गौरी सांवरिया, कृष्ण नरायन सिंह, चरनजीत गांधी और सपा की सबा हसन मंसूरी का नाम शामिल है। चुनाव को पारदर्शी और सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासन ने समय सारणी तय कर दी है। 22 जून को सुबह 11 बजे सदन का विशेष अधिवेशन शुरू होगा। इसके बाद 11 से 11:30 बजे तक नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे, जबकि 11:30 से 12 बजे तक नाम वापिसी का समय रहेगा। इसके तुरंत बाद 12:10 बजे तक पर्चों की जांच कर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी जाएगी। दोपहर 3 से 5 बजे के बीच पार्षदों द्वारा मतदान किया जाएगा और उसी शाम मतगणना के बाद परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

नगर निगम कार्यकारिणी सीधे तौर पर शहर के विकास कार्यों, बजट और नागरिक सुविधाओं से जुड़े अहम फैसले लेती है। उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम के तहत इन सदस्यों का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस स्थानीय निकाय चुनाव को बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा जहां अपनी जमीनी पकड़ को और मजबूत कर हैट्रिक लगाने के इरादे से मैदान में है, वहीं मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी भी इस चुनाव के जरिए अपनी ताकत का अहसास कराना चाहती है। राजधानी लखनऊ के इस नगर निगम चुनाव के नतीजों को दोनों ही दल आगामी विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के तौर पर देख रहे हैं, क्योंकि यहां से तय होने वाला सियासी माहौल पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम करेगा।

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