मप्र विधानसभा में यूसीसी विधेयक पारित

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित हो गया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश यूसीसी विधेयक पारित करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया।
मप्र विधानसभा में यूसीसी विधेयक पारित
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सदन में पारित हुआ यूसीसी विधेयक

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने 20 जुलाई को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 पेश किया था। विधानसभा में 21 जुलाई को हुई चर्चा के बाद विधेयक पारित कर दिया गया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया। इससे पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 19 जुलाई को आयोजित कैबिनेट बैठक में विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी गई थी। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद सरकार ने विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए विधानसभा में प्रस्तुत किया। विधेयक पारित होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और पारिवारिक अधिकारों से संबंधित व्यक्तिगत कानूनों में समानता लागू करने को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक कदम

मध्य प्रदेश विधानसभा में 21 जुलाई को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक और सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों में भिन्नता के कारण नागरिकों, खासकर महिलाओं, को कई मामलों में समान अधिकार नहीं मिल पाते हैं। यूसीसी के माध्यम से सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था और अधिकार सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों में भिन्नता के कारण नागरिकों, खासकर महिलाओं, को कई मामलों में समान अधिकार नहीं मिल पाते हैं।

महिला सशक्तीकरण पर सरकार का जोर

भाजपा सरकार का कहना है कि विधेयक का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। प्रस्तावित कानून में महिलाओं को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, संपत्ति और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में समान अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तीकरण को मजबूत करेगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी धर्म या समुदाय के विरुद्ध नहीं है, बल्कि संवैधानिक समानता और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण सुधार है।

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