

उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बनी असमंजस की स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही आयोजित किए जाएंगे। नई दिल्ली स्थित 'भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान' में आयोजित पहले अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि राज्य में फरवरी-मार्च 2027 में चुनाव प्रस्तावित हैं और संवैधानिक अनिवार्यता के तहत इन्हें हर हाल में समय सीमा के भीतर कराया जाएगा। दरअसल, अगले वर्ष फरवरी में प्रस्तावित जनगणना के तीसरे चरण और विधानसभा चुनाव के एक ही समय पर होने के कारण कयास लगाए जा रहे थे, जिस पर विराम लगाते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि जनगणना एक कानूनी प्रक्रिया है जबकि चुनाव एक संवैधानिक दायित्व है, यही वजह है कि चुनावी प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और यदि आवश्यक हुआ, तो जनगणना की समय-सारणी में आंशिक बदलाव या स्थगन किया जा सकता है।
इस महत्वपूर्ण घोषणा के साथ ही निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश की तीन रिक्त विधानसभा सीटों—घोसी, दुद्धी और फरीदपुर—पर अब उपचुनाव न कराने का भी बड़ा निर्णय लिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने इसके पीछे वैधानिक नियमों का हवाला देते हुए कहा कि पहले राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चल रहा था और उसके बाद आयोग पश्चिम बंगाल के चुनावों सहित अन्य आवश्यक कार्यों में व्यस्त रहा। चूंकि अब उत्तर प्रदेश के मुख्य आम चुनाव में एक वर्ष से भी कम का समय शेष रह गया है, इसलिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत इन सीटों पर अलग से उपचुनाव नहीं कराए जाएंगे और यहाँ अब सीधे आगामी विधानसभा चुनाव के साथ ही मतदान होगा। इसके अतिरिक्त, मतदान प्रक्रिया के दौरान सीसीटीवी निगरानी और देश में ऑनलाइन वोटिंग की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज करते हुए आयोग ने कहा कि यह व्यवस्था मतदाताओं की गोपनीयता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगी, इसलिए चुनाव पारंपरिक रूप से पोलिंग बूथों पर ही पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न होंगे।
देश की लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत भारत की करीब 95 करोड़ मतदाताओं वाली मतदाता सूची को एक 'जीवंत दस्तावेज' के रूप में लगातार अद्यतन किया जाता है। इस व्यापक चुनावी व्यवस्था को जमीनी स्तर पर सुचारू रूप से चलाने के लिए 12 लाख से ज्यादा बूथ स्तरीय अधिकारियों और 15 लाख से अधिक बूथ स्तरीय एजेंटों की एक बड़ी टीम को पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 तक है, जिसे देखते हुए राज्य में प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं ताकि आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले विकास कार्यों को समय से पूरा किया जा सके। निर्वाचन आयोग द्वारा तय किया गया यह रोडमैप तय समय सीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ चुनाव संपन्न कराने की दिशा में काम कर रहा है।