Politics

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी 125वीं जयंती अभियान

बलिदान दिवस से जयंती तक पंद्रह दिवसीय 'संस्मरण पक्ष' के तहत देशव्यापी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और बूथ सशक्तिकरण का महा-अभियान।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 125वें जयंती वर्ष के ऐतिहासिक अवसर पर 23 जून (बलिदान दिवस) से 6 जुलाई (जयंती) तक 15 दिनों का देशव्यापी विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसे 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती संस्मरण पक्ष' का नाम दिया गया है। इस भव्य राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के सुचारू समन्वय और संचालन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्तर पर गठित 7 वरिष्ठ नेताओं की एक उच्च स्तरीय टोली को सौंपी गई है। इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य शहरों और नगरों में प्रमुख सड़कों व पार्कों का नामकरण करना तथा उनकी मूर्तियों की स्थापना कर राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना है। इसी कड़ी में, पश्चिम बंगाल पर पार्टी का विशेष ध्यान केंद्रित है, जहां कोलकाता में उनकी 125 फुट ऊंची गगनचुंबी प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की गई है और राज्य के हर बूथ स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही दिल्ली, अंबाला, पठानकोट, जम्मू एवं श्रीनगर जैसे प्रमुख शहरों में भी बड़े स्तर पर वैचारिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

सांगठनिक सुदृढ़ीकरण की दृष्टि से विभिन्न राज्यों में जमीनी स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। बिहार भाजपा ने अपने सभी 1,420 मंडलों एवं 52 जिलों में प्रशिक्षण वर्गों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, अब राज्य के लगभग 92 हजार बूथों पर डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक व्यापक प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है। इस डिजिटल अभियान में कार्यकर्ताओं को 4 मॉड्यूल पर आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा और परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें डिजिटल प्रमाणपत्र भी मिलेगा। वहीं, पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी इस अवधि के दौरान सांगठनिक मजबूती को गति देते हुए 1 लाख 60 हजार से अधिक संगठनात्मक बूथों पर विचार गोष्ठियों के साथ-साथ 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और तकनीकी माध्यमों से बूथ सशक्तिकरण के अगले चरण को शुरू किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश में भाजपा इकाई इस पखवाड़े को जमीनी स्तर पर 'बूथ गौरव दिवस' के रूप में आयोजित कर रही है, जिसमें वैचारिक गोष्ठियों पर विशेष जोर दिया गया है। इन आयोजनों की प्रत्यक्ष निगरानी के लिए केंद्रीय संचालन समिति के वरिष्ठ सदस्य और प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। भाजपा इस वृहद अभियान के जरिए न केवल डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर रही है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निष्कासन और 'एक देश, एक विधान, एक निशान' के संकल्प की सिद्धि को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य भी कर रही है।अपने संस्थापकों के गौरवमयी इतिहास के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता में राष्ट्र के प्रति गौरव और आत्माभिमान जगाने की यह एक बड़ी और प्रभावी कोशिश है।

डॉ. मुखर्जी का ऐतिहासिक अवदान और राष्ट्र-प्रथम का संकल्प

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी, प्रखर चिंतक और स्वतंत्र भारत के इतिहास के एक दैदीप्यमान नक्षत्र थे। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्म तिथि 6 जुलाई 1901 है। उनका जन्म कलकत्ता (अब कोलकाता) के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बनने वाले डॉ. मुखर्जी ने देश के शिक्षा जगत को नई दिशा दी। वर्ष 1943 से 1946 तक अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे डॉ. मुखर्जी ने देश के विभाजन का पुरजोर विरोध किया, लेकिन जब विभाजन अपरिहार्य हो गया तो उन्होंने अपनी विशिष्ट रणनीति से मुस्लिम लीग के मंसूबों को नाकाम कर आधा बंगाल और आधा पंजाब खंडित भारत के लिए बचा लिया। स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री के रूप में उन्होंने देश की मजबूत औद्योगिक नीति की नींव रखी, किंतु तुष्टिकरण और राष्ट्रीय हितों से समझौता न करने की अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता के कारण उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद अक्टूबर 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो संसद में सबसे बड़ा विपक्षी दल बनकर उभरा। देश की सांस्कृतिक अखंडता के प्रबल समर्थक डॉ. मुखर्जी जम्मू-कश्मीर में अलग झंडे, अलग संविधान और अलग प्रधानंमत्री ('एक देश में दो निशान, दो विधान, दो प्रधान') के सख्त खिलाफ थे। संसद में धारा-370 को समाप्त करने की जोरदार वकालत करते हुए उन्होंने संकल्प लिया था कि वे कश्मीर को भारत का पूर्ण अंग बनाएंगे। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए 1953 में बिना परमिट कश्मीर यात्रा के दौरान उन्हें नजरबंद कर लिया गया, जहां 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उन्होंने देश की अखंडता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली भारतीय जनता पार्टी इस महा-अभियान के जरिए न केवल अपने वैचारिक अधिष्ठान को मजबूत कर रही है, बल्कि देश की युवा पीढ़ी को अपनी माटी के महान नायकों के संघर्षों से भी जोड़ रही है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी महज़ एक राजनेता नहीं, बल्कि एक महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग व आपूर्ति मंत्री थे, जिन्होंने देश की शुरुआती औद्योगिक नीति की मजबूत नींव रखी थी। देश की अखंडता के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान आज भी भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता को 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की निरंतर प्रेरणा देता है।

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