गोवा में इन दिनों सांस्कृतिक गौरव और राजनीतिक सक्रियता का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। हाल ही में पूरे राज्य में 18 जून को 80वां 'गोवा क्रांति दिवस' बेहद जोर-शोर से मनाया गया। पणजी के ऐतिहासिक आजाद मैदान में आयोजित मुख्य राजकीय समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन किया। इस गरिमामयी अवसर पर राज्य सरकार ने एक सराहनीय कदम उठाते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों और उनके आश्रितों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र और विशेष सहायता राशि प्रदान की। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने राज्य के करीब 40 हजार फ्लैट धारकों को मालिकाना हक देने के लिए बहुप्रतीक्षित 'माझा फ्लैट' योजना और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए 'दिव्य निवास योजना' को लागू कर जनता को बड़ी राहत दी है, जिससे सरकार की विकासपरक नीतियों के प्रति आम लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
इस प्रशासनिक सक्रियता के बीच, राज्य के राजनीतिक दल भी आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर अपने-अपने स्तर पर संगठन को मजबूत करने में जुट गए हैं। इसी क्रम में, प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य में रक्षात्मक रवैया अपनाने के बजाय जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। कांग्रेस आलाकमान का पूरा ध्यान इस समय जमीनी स्तर पर संगठन का पुनर्गठन करने और कार्यकर्ताओं को सीधे जनता से जोड़ने पर है।
क्षेत्रीय ताकतों के रूप में चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाते हुए गोवा फॉरवर्ड पार्टी के प्रमुख विजय सरदेसाई ने गठबंधन की स्थिति पर सहयोगी दल कांग्रेस से जल्द ही निर्णायक चर्चा करने की मांग की है। इस मांग के पीछे का एक मुख्य कारण पार्टी विलय और नेता प्रतिपक्ष के पद से जुड़े प्रस्तावों पर आया गतिरोध माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूर्व में दिए गए सांगठनिक प्रस्तावों और विभिन्न विकल्पों पर दोनों पक्षों के बीच अभी अंतिम सहमति बनना बाकी है, जिसके चलते क्षेत्रीय संगठन अब भविष्य की चुनावी रूपरेखा तय करने में और अधिक देरी के पक्ष में नहीं है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए गोवा फॉरवर्ड पार्टी आगामी सितम्बर महीने से ‘ऑपरेशन विजय’ अभियान शुरू करने जा रही है। इसके तहत पार्टी शुरुआती चरण में चिन्हित की गई 10 विधानसभा सीटों पर अपनी ब्लॉक समितियों का गठन कर चुकी है, जिसे आने वाले समय में बढ़ाकर 25 सीटों तक ले जाने की योजना है।
राज्य के अन्य प्रमुख राजनीतिक दल जैसे आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और महराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी भी आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए अपने-अपने स्तर पर सांगठनिक तैयारियां और जनसंपर्क अभियान तेज कर रहे हैं।
रणनीतिकारों का मानना है कि बूथ स्तर पर सांगठनिक मजबूती ही भविष्य के चुनावों का मुख्य आधार बनेगी, जिसके लिए अब सभी राजनीतिक दल विभिन्न क्षेत्रों में विशेष जनसंपर्क अभियान चला कर मतदाताओं को साधने के प्रयास करेंगे। भाजपा सदैव ही चुनावी मिशन पर तैयार रहती है अन्य दल भी अब भाजपा की राह पर चलते हुए तैयारियां शुरू कर रहे हैं।
गोवा का यह वर्तमान परिदृश्य स्पष्ट करता है कि जहां एक ओर सत्तारूढ़ भाजपा सरकार अपनी जन-कल्याणकारी योजनाओं, प्रशासनिक सुधारों और 'स्वयंपूर्ण गोवा' के संकल्प के जरिए जनता के बीच अपनी पैठ को और गहरा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और गोवा फॉरवर्ड पार्टी जैसे दल भी अपनी स्वतंत्र सांगठनिक क्षमता को बढ़ाने के लिए सक्रिय हैं। राज्य की इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी दल अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं, जिससे आने वाले दिनों में गोवा का राजनीतिक माहौल और अधिक रणनीतिक और रोचक होने की संभावना है।