देश में पेट्रोल और डीजल की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा इसकी जमाखोरी व कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय लिया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, अब किसी भी पेट्रोल पंप से एक दिन में किसी एक वाहन या व्यक्ति को 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दिया जाएगा। सरकार का यह नियम मुख्य रूप से ईंधन की अवैध री-सेल (पुनः बिक्री) को रोकने और खुदरा बाजारों में आम नागरिकों के लिए तेल की उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है। वर्तमान में पेट्रोल की बिक्री पर ऐसी कोई सीमा तय नहीं की गई है, जिससे आम वाहन चालकों को किसी भी तरह की असुविधा न हो।
इस कड़े कदम के पीछे एक बड़ा कारण रिटेल (खुदरा) और बल्क (थोक) कीमतों में आया भारी अंतर है। वर्तमान में आम पेट्रोल पंपों पर डीजल करीब 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि औद्योगिक व कमर्शियल खरीदारों के लिए थोक दर लगभग 134.50 रुपये प्रति लीटर है। इस 39.30 रुपये प्रति लीटर के बड़े अंतर का गलत फायदा उठाते हुए कई बड़ी फैक्ट्रियां, कमर्शियल संस्थान और औद्योगिक इकाइयां थोक में तेल खरीदने के बजाय रिटेल पेट्रोल पंपों से ही भारी मात्रा में डीजल उठाने लगी थीं। इस विसंगति के कारण आम जनता के लिए पेट्रोल पंपों पर ईंधन की किल्लत होने का खतरा पैदा हो रहा था। सरकार ने इस विसंगति को भांपते हुए तुरंत यह सुधारात्मक कदम उठाया है।
नए नियमों के तहत अब औद्योगिक, कमर्शियल और संस्थागत बड़े खरीदार आम खुदरा पेट्रोल पंपों से तेल नहीं खरीद पाएंगे। उन्हें अपनी आवश्यकता का ईंधन केवल अपने निर्धारित 'कंज्यूमर पंप' से ही लेना होगा। मंत्रालय द्वारा जारी यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर अधिकतम 90 दिनों के लिए प्रभावी की गई है, जिसकी समीक्षा कर आवश्यकतानुसार इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी विशेष क्षेत्र या लेन-देन में वास्तविक आवश्यकता होगी, तो नियमों में उचित छूट भी दी जा सकती है, जिससे माल परिवहन और आवश्यक सेवाओं पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
इस राष्ट्रीय नीति को जमीनी स्तर पर पूरी पारदर्शिता से लागू करने के लिए राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। जमाखोरी और अनधिकृत खरीद को रोकने के लिए राजपत्रित अधिकारियों, तेल कंपनियों के सेल ऑफिसर्स और पुलिस के उच्च अधिकारियों को निगरानी व जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। केंद्र सरकार का यह फैसला न केवल ईंधन वितरण प्रणाली में अनुशासन और पारदर्शिता लाएगा, बल्कि बाजार में कीमतों के संतुलन को बनाए रखते हुए आम उपभोक्ताओं के अधिकारों और हितों की भी पूरी तरह रक्षा करेगा।