भारत ने अपने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है, जहां राष्ट्रीय भाषा एआई प्लेटफॉर्म 'भाषिनी' अब पूरी तरह से स्वदेशी क्लाउड और जीपीयू बुनियादी ढांचे पर संचालित हो रहा है। योटा डेटा सर्विसेज के सहयोग से किया गया यह माइग्रेशन भारत के डेटा को देश की सीमाओं के भीतर सुरक्षित रखने के साथ-साथ विदेशी हाइपरस्केलर्स पर निर्भरता को कम करता है। इस पूरी प्रक्रिया को इंडिया-एआई मिशन के उद्देश्यों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, जो भविष्य में भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस तकनीकी बदलाव के दौरान 200 टीबी से अधिक डेटा और 3.5 अरब फाइलों को बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया, जो भारतीय क्लाउड प्रदाताओं की बढ़ती ताकत और विश्वसनीयता को दर्शाता है।
इस माइग्रेशन के परिणाम न केवल सुरक्षा के लिहाज से बल्कि प्रदर्शन के मामले में भी बेहद प्रभावशाली रहे हैं। भाषिनी प्लेटफॉर्म के स्वदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर पर आने से परिचालन लागत में लगभग 20 से 30 प्रतिशत की बचत हुई है और सिस्टम के प्रदर्शन में 40 प्रतिशत तक का सुधार दर्ज किया गया है। महाकुंभ 2025 जैसे विशाल जनसमूह वाले आयोजन में इस प्लेटफॉर्म का सफल परीक्षण किया गया, जहाँ 'कुंभ सहाय' जैसे एआई आधारित अनुवादकों ने वास्तविक समय में कई भारतीय भाषाओं में लोगों की मदद की। यह सफलता यह प्रमाणित करती है कि भारत अब अपने स्वयं के संसाधनों के दम पर बड़े पैमाने पर एआई समाधान देने में पूरी तरह सक्षम है।
यह पूरी परियोजना अब अन्य सरकारी मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों के लिए एक आदर्श ढांचे (रेफरेंस आर्किटेक्चर) के रूप में कार्य करेगी। ओपन-सोर्स और क्लाउड-एग्नोस्टिक घटकों का उपयोग करने के कारण यह सिस्टम किसी एक वेंडर पर निर्भर नहीं है, जिससे रणनीतिक स्वायत्तता बनी रहती है। यह पहल भारत के उस विजन को साकार करती है जहाँ एआई को एक सुरक्षित और समावेशी सार्वजनिक उपयोगिता के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल आर्थिक विकास को गति देगा बल्कि डिजिटल विभाजन को पाटकर हर नागरिक तक तकनीक की पहुँच सुनिश्चित करेगा।