Science and Technology

Apple-Google AI डील: Gemini से पावर होगी Siri

Apple ने Siri और Apple Intelligence के लिए Google Gemini चुना। इससे दो अरब डिवाइसों पर जेमिनाई जाएगा, अल्फाबेट वैल्यू 4 ट्रिलियन पहुंची, एलॉन मस्क ने शक्ति केंद्रीकरण पर आपत्ति जताई।

Apple और Google के बीच हुई नई AI डील, Apple ने फैसला किया है कि उसकी नेक्स्ट जेन Siri और Apple Foundation Models अब Google के Gemini AI से पावर होंगे, जो सीधे दो अरब से अधिक एक्टिव Apple डिवाइसों तक पहुंचेगा। यह कदम सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक संदेश भी देता है।

अब तक Siri को लेकर सबसे बड़ी शिकायत यही थी कि वह ChatGPT जैसे जेनेरेटिव AI मॉडल्स की तुलना में कमजोर, सिंगल कमांड तक सीमित और मल्टी स्टेप रीजनिंग में फेल साबित होती थी। Gemini के आने के बाद Siri यूज़र के कॉन्टेक्स्ट को याद रखकर लंबी, मल्टी स्टेप क्वेरीज़, ऑटोमेशन और ऐप टू ऐप वर्कफ़्लो हैंडल कर पाएगी, जैसे कैलेंडर चेक करके टिकट बुकिंग, रिमाइंडर और ईमेल ड्राफ्टिंग एक ही बातचीत में करना। यानी स्मार्टफोन का फोकस सिर्फ कैमरा और डिस्प्ले से हटकर सीधे इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन पर शिफ्ट हो रहा है।

Apple के लिए यह डील एक प्रकार का स्ट्रैटेजिक यू टर्न भी है। कंपनी सालों से “सब कुछ इन हाउस” बनाने की इमेज पर चलती रही, लेकिन बड़े AI मॉडल खड़े करने के लिए हजारों GPU, बिलियनों डॉलर और विशाल डेटा सेट्स की जरूरत ने आउटसोर्सिंग को मजबूरी से अवसर बना दिया। Apple पहले चरण में ChatGPT को एक ऑप्शनल इंटीग्रेशन के रूप में टेस्ट कर चुका था, लेकिन फाउंडेशन लेयर के लिए उसने आखिरकार Google Gemini को “सबसे सक्षम बेस” मानते हुए मल्टी ईयर पार्टनरशिप साइन की। इससे OpenAI को एक बड़े, प्रीमियम प्लेटफॉर्म की स्थायी पार्टनरशिप खोनी पड़ी।

Google के लिए यह सौदा दोहरी जीत है। एक तरफ Gemini पहले से Samsung की Galaxy AI फीचर्स को पावर कर रहा है, दूसरी तरफ अब उसे Apple के विशाल इंस्टॉल बेस तक सीधे पहुंच मिल रही है, जिससे Gemini व्यावहारिक रूप से ग्लोबल डिफॉल्ट कंज्यूमर AI असिस्टेंट जैसा स्टेटस पा सकता है। घोषणा के कुछ ही घंटों में Alphabet की मार्केट वैल्यू 4 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गई और शेयर प्राइस ऑल टाइम हाई के आसपास दर्ज हुआ।

यहीं से एलॉन मस्क की आपत्ति शुरू होती है। xAI और Grok के संस्थापक मस्क ने इस साझेदारी को Google के लिए “unreasonable concentration of power” बताया, यह दलील देते हुए कि एक ही कंपनी के पास Android, Chrome, सर्च और अब Apple के AI लेयर में भी गहरी घुसपैठ होना प्रतिस्पर्धा और लोकतांत्रिक इंटरनेट दोनों के लिए जोखिम है। एंटी ट्रस्ट वॉचडॉग पहले से Google की सर्च और ऐड डॉमिनेंस की जांच कर रहे हैं, इसलिए यह डील रेगुलेटर्स के रडार पर और तेज रोशनी डालेगी।

सबसे पेचीदा सवाल प्राइवेसी का है। Apple और Google दोनों दावा कर रहे हैं कि Apple Intelligence “ऑन डिवाइस” और Private Cloud Compute के ज़रिए, अपनी पारंपरिक प्राइवेसी स्टैंडर्ड्स को बरकरार रखेगा, जबकि Gemini बस मॉडल और क्लाउड इंफ्रा उपलब्ध कराएगा। लेकिन आलोचकों का तर्क है कि जब बैक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर पर Google की पकड़ होगी, तो डेटा फ्लो, लॉगिंग और मॉडल ट्रेनिंग को लेकर पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल रहेगा।

AI अब बिजली, इंटरनेट और सेमीकंडक्टर की तरह “कोर इंफ्रास्ट्रक्चर” बन चुका है। जो देश और कंपनियां इस इंफ्रास्ट्रक्चर पर कंट्रोल नहीं बना पाएंगी, वे सिर्फ ऐप लेयर प्लेयर्स बनकर रह जाएंगी। Apple–Google डील इसी नई AI भू राजनीति का सबसे ताज़ा और ताकतवर उदाहरण है।

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