

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए देश के चार प्रमुख राज्यों—दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और त्रिपुरा में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की है। पार्टी हाईकमान ने दिल्ली की कमान सांसद और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को सौंपी है, जबकि पंजाब में संगठन के विस्तार की जिम्मेदारी सरदार केवल सिंह ढिल्लों को दी गई है। इसके साथ ही त्रिपुरा में सक्रिय नेता अभिषेक देबरॉय को कमान सौंपी गई है, तो वहीं सबसे चौंकाने वाला और ऐतिहासिक बदलाव हरियाणा में देखने को मिला है, जहां भाजपा ने अपने इतिहास में पहली बार किसी महिला को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।
निवर्तमान अध्यक्ष मोहन लाल बडौली के स्थान पर पानीपत की रहने वाली और पेशे से रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना गुप्ता को यह अहम जिम्मेदारी दी गई है, जो इससे पहले प्रदेश महामंत्री के रूप में काम कर रही थीं। इसे भाजपा नेतृत्व द्वारा महिला नेतृत्व और संगठनात्मक अनुभव पर बड़े भरोसे के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि हरियाणा में हाल ही में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए हैं और अब पार्टी का ध्यान स्थानीय निकाय चुनावों तथा भविष्य की रणनीतियों पर केंद्रित है।
इस पूरे फेरबदल में सबसे अधिक चर्चा पंजाब को लेकर हो रही है, जहाँ पार्टी ने सुनील जाखड़ की जगह बरनाला के पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता सरदार केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। वर्ष 2022 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए केवल सिंह ढिल्लों पंजाब के एक बड़े उद्योगपति हैं और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं। मालवा क्षेत्र में गहरी पकड़ रखने वाले ढिल्लों को विकास पुरुष के रूप में जाना जाता है और भाजपा ने उन्हें कमान सौंपकर राज्य के किसान व कारोबारी वर्ग को साधने का बड़ा दांव खेला है। पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव वर्ष 2027 में होना है, जिसे देखते हुए भाजपा ने अभी से ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने और नए सामाजिक समीकरण बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
इसी तरह त्रिपुरा में भी वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले स्थानीय निकाय और स्वायत्त जिला परिषद चुनावों को देखते हुए अभिषेक देबरॉय के जरिए संगठन के विस्तार की नींव रखी गई है। दिल्ली में भी हालिया चुनावों के बाद राष्ट्रीय राजधानी की सियासी सक्रियता को बनाए रखने के लिए हर्ष मल्होत्रा के संगठनात्मक अनुभव का लाभ उठाने का प्रयास किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन नियुक्तियों से साफ है कि भाजपा केवल चुनाव के समय ही नहीं बल्कि हर समय संगठन को सक्रिय रखने की रणनीति पर काम कर रही है ताकि स्थानीय नेतृत्व को मजबूत कर आने वाली हर चुनावी चुनौती के लिए एक ठोस आधार तैयार किया जा सके।