Politics

मिश्रिख सीट का समीकरण और रूपरेखा

नैमिषारण्य धाम और दलित बाहुल्य आबादी के बीच मिश्रिख सीट पर धार्मिक विकास और स्थानीय जनमुद्दों के संतुलन का मुकाबला है।

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित मिश्रिख (सुरक्षित) विधानसभा सीट धार्मिक आस्था और राजनीतिक वर्चस्व का एक बड़ा केंद्र मानी जाती है। एक तरफ विश्व प्रसिद्ध पौराणिक तीर्थ नैमिषारण्य का धार्मिक महत्व है, तो दूसरी तरफ बहुसंख्यक दलित मतदाता चुनाव की दिशा तय करते हैं। 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर 2012 में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक रामपाल राजवंशी ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 और 2022 के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान विधायक रामकृष्ण भार्गव ने जीत हासिल की।

क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा नैमिषारण्य को अयोध्या और काशी की तर्ज पर बड़े धार्मिक टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। नैमिष कॉरिडोर का निर्माण, सड़कों का चौड़ीकरण, परेठी पुल की मंजूरी और बिजली व्यवस्था सुदृढ़ करने जैसे कार्य जारी हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दल किसानों के खाद-बीज से जुड़े मुद्दों और स्थानीय स्तर पर कॉरिडोर निर्माण से उत्पन्न समस्याओं को उठाकर चुनाव में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

2027 के आगामी राजनीतिक समीकरणों में भाजपा के वर्तमान विधायक रामकृष्ण भार्गव और सपा के पूर्व विधायक रामपाल राजवंशी, दोनों ही जमीनी स्तर पर अपनी-अपनी पार्टियों के प्रचार-प्रसार और सांगठनिक गतिविधियों में पूरी तरह से सक्रिय हैं। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी की ओर से घोषित उम्मीदवार अभिलाषा वर्मा भी एक प्रमुख कारक के रूप में सामने आ रही हैं। वहीं चंद्रशेखर आजाद की अगुवाई वाली आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और अन्य निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं।

मिश्रिख विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों में पासी वर्ग के लगभग 65,000, जाटव वर्ग के लगभग 60,000, अति पिछड़ा वर्ग (तेली, कश्यप, नाई आदि) के लगभग 40,000, ब्राह्मण वर्ग के लगभग 35,000, कुर्मी वर्ग के लगभग 20,000 तथा ठाकुर, मुस्लिम और यादव वर्ग के प्रत्येक लगभग 15,000-15,000 मतदाता प्रमुख भूमिका में हैं।

वर्तमान भाजपा विधायक रामकृष्ण भार्गव इस बार हैट्रिक लगाने की कोशिश में अत्याधिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं। जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार क्षेत्र के सर्वांगीण विकास, किसान कल्याण और सभी जातियों व वर्गों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने का हरसंभव प्रयास कर रही है।

आगामी विधानसभा चुनावों तक इस क्षेत्र के सियासी समीकरण क्या रूप लेते हैं, यह तो आने वाला समय और चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे।

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