किशाऊ परियोजना पर ऐतिहासिक सहमति

छह राज्यों के बीच ऐतिहासिक जल समझौता संपन्न हुआ, जिससे किशाऊ परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों को प्रचुर मात्रा में पानी और बिजली मिलेगी।
किशाऊ परियोजना पर ऐतिहासिक सहमति
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दशकों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर आखिरकार एक ऐतिहासिक और निर्णायक समझौता संपन्न हो गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की गरिमामयी मौजूदगी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के बीच अंतरराज्यीय जल समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की उपस्थिति ने इस समझौते को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। किशाऊ परियोजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट गुरुत्व बांध बनाया जाएगा, जो टिहरी बांध के बाद एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध होगा। लगभग 13 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली इस राष्ट्रीय परियोजना का 90 प्रतिशत वित्तीय भार केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि सहभागी राज्यों द्वारा वहन की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के 2035 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी संग्रहित किया जा सकेगा।

जल बंटवारे की व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, हरियाणा को 836 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी प्राप्त होगा। इसके साथ ही 660 मेगावाट की स्थापित क्षमता से लगभग 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत का उत्पादन होगा, जो उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच समान रूप से बंटेगी। परियोजना से 97 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और ढकरानी, ढालीपुर, खोदरी तथा छिबरो जैसे पुराने हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होगी। इस परियोजना का एक बेहद महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहलू यह है कि इससे मिलने वाले पानी का 25 प्रतिशत हिस्सा यमुना नदी के पर्यावरणीय प्रवाह को बनाए रखने के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। चूंकि यमुना का प्रयागराज में गंगा से संगम होता है, इसलिए यमुना के संरक्षण से सीधे तौर पर गंगा की स्वच्छता को भी नया बल मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन और उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृढ़ इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि तीन दशकों से अधिक समय से अटका यह जटिल अंतरराज्यीय जल विवाद अब स्थायी समाधान की ओर बढ़ सका है। वर्ष 2018 से लगातार किए जा रहे प्रयासों और डबल इंजन सरकार के जन-कल्याणकारी विजन ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी नीत केंद्र और राज्य सरकारें देश के विकास, किसानों की खुशहाली और अंतरराज्यीय सौहार्द को सर्वोपरि मानती हैं। उत्तर प्रदेश में जल सुरक्षा, कृषि समृद्धि और विद्युत ढांचे को सशक्त बनाने की दिशा में उठाया गया यह कदम आने वाले समय में राज्य की निरंतर प्रगति के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

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