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स्वदेशी 'वाहक-6' मल्टी-ड्रोन मदरशिप से बढ़ेगी सेना की ताकत

स्वदेशी 'वाहक-6' सिस्टम बिना जीपीएस के सटीक हमला कर भारतीय सेना की ताकत बढ़ाएगा।

भारत की सैन्य और रक्षा क्षमता को और अधिक मजबूती देने के लिए पूरी तरह स्वदेशी 'वाहक-6' मल्टी-ड्रोन मदरशिप प्रणाली विकसित की गई है। निजी एयरोस्पेस कंपनी एंड्योरएयर  ने सरकारी रक्षा उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ मिलकर इस अत्याधुनिक प्रणाली को तैयार किया है। यह सिस्टम मुख्य रूप से भारतीय सेना को सर्च, डिटेक्ट से लेकर सटीक हमला  करने की संपूर्ण प्रक्रिया में मदद करेगा। इस प्रणाली में एक हेलीकॉप्टरनुमा मदरशिप 'सबल-20' पर वाहक-6 प्रणाली को इंटीग्रेट किया गया है, जो हवा में एक साथ 6 माइक्रो-यूएवी 'अलख' को ले जाकर तैनात करने में पूरी तरह सक्षम है।

यह प्रणाली दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग प्रयासों से पूरी तरह सुरक्षित है और बिना जीपीएस सिग्नल के भी अपने मिशन को अंजाम दे सकती है। इसमें अलख माइक्रो-यूएवी के दो विशेष वेरिएंट शामिल किए गए हैं। पहला 'अलख-एस', जिसका उपयोग लक्ष्य की खोज और निगरानी के लिए होता है। दूसरा 'अलख-के', जो जरूरत पड़ने पर सीधे दुश्मन के ठिकानों पर सटीक प्रहार कर सकता है। जब अलख-एस हवा में किसी लक्ष्य की पहचान करता है, तो मदरशिप और अन्य ड्रोन के बीच तुरंत डेटा और सूचनाएं साझा की जाती हैं। इसके बाद बिना समय गंवाए हमलावर ड्रोन दुश्मन के ठिकाने को तबाह कर देते हैं।

तकनीकी विशेषताओं की बात करें तो 'सबल-20' मदरशिप इलेक्ट्रिक टैंडम रोटर और वेरिएबल पिच तकनीक से लैस है, जो सीधे उड़ान भरने की क्षमता रखता है। यह समुद्र तल से 4,000 मीटर तक की ऊंचाई और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भी 20 किलो तक का पेलोड उठाकर आसानी से ऑपरेशन चला सकता है। यह सिस्टम लंबी दूरी के ऑपरेशनों में सेना की ताकत बढ़ाएगा और मानवयुक्त विमानों तथा सैनिकों के लिए जोखिम को काफी कम करेगा। सुरक्षा के लिहाज से इसमें डुअल जीपीएस बैकअप, ऑटो-रिटर्न और इमरजेंसी पैराशूट सिस्टम जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। सैन्य हमलों और निगरानी के अलावा, इसका इस्तेमाल एक साथ कई दिशाओं में नजर रखने, आपदा के समय राहत-बचाव कार्य करने तथा दवाइयों या अन्य जरूरी सामान को दुर्गम स्थानों तक पहुंचाने में भी किया जा सकता है।

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