मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा का चुनावी समीकरण

आगामी चुनावों में मुजफ्फरनगर सदर सीट पर भाजपा-रालोद गठबंधन के मजबूत जातीय समीकरण और प्रमुख दावेदारों के बीच कांटे की टक्कर होने के आसार हैं।
मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा का चुनावी समीकरण
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यूपी की मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा (सीट संख्या 14) पश्चिम उत्तर प्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील सीटों में से एक है। वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा के कपिल देव अग्रवाल ने रालोद-सपा प्रत्याशी सौरभ स्वरूप को 18,694 वोटों से शिकस्त दी थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान इस क्षेत्र में भाजपा की बढ़त सिमटकर मात्र 801 वोटों की रह गई थी, जिसने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में इस बार सबसे बड़ा सियासी बदलाव यह है कि राष्ट्रीय लोक दल भाजपा के साथ एनडीए गठबंधन का हिस्सा है, जिससे जाट, वैश्य और अति-पिछड़े मतों के एक साथ लामबंद होने की प्रबल संभावना बन रही है।

इस विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 3.75 लाख के करीब है, जहां का जातीय गणित काफी निर्णायक भूमिका निभाता है। क्षेत्र में सबसे बड़ा एकल वोट बैंक मुस्लिम समुदाय का है, जिनकी संख्या लगभग 1.25 लाख से 1.30 लाख (करीब 35-37%) के आसपास है। इसके बाद वैश्य (अग्रवाल, जैन, गुप्ता) और सवर्ण समाज (ब्राह्मण, त्यागी, पंजाबी) का एक बड़ा कोर ग्रुप है, जिनकी संयुक्त संख्या लगभग 80,000 से 90,000 के बीच है। अन्य पिछड़े वर्ग में प्रजापति, पाल, सैनी, कश्यप और गुर्जर मतदाता मिलाकर करीब 60,000 से 65,000 हैं, जबकि जाट मतदाता लगभग 25,000 से 30,000 और अनुसूचित जाति (दलित) मतदाता लगभग 35,000 से 40,000 के करीब हैं।

कपिल देव अग्रवाल के फिर से चुनाव लड़ने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है क्योंकि वह लगातार तीन बार (2015 उपचुनाव, 2017, 2022) विधायक रहे हैं और योगी सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। वैश्य समुदाय पर उनकी मजबूत पकड़ और संगठन में ऊंची पहुंच उनकी सबसे बड़ी ताकत है। हालांकि, क्षेत्र में उनके खिलाफ कुछ स्थानीय चुनौतियां भी देखने को मिल रही हैं। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल और भाजपा-रालोद के मजबूत जातीय गणित के चलते भाजपा अभी इस सीट पर शीर्ष दावेदार के रूप में आगे नजर आ रही है।

भाजपा खेमे से कपिल देव अग्रवाल के विकल्प के तौर पर गौरव स्वरूप (पत्नी मीनाक्षी स्वरूप वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष) का नाम भी सक्रियता से चर्चा में है, जबकि स्थानीय स्तर पर सुनील तायल, सी. मोहन तायल व ममता अग्रवाल जैसे चेहरे भी टिकट की होड़ में हैं। वहीं दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन से समाजवादी पार्टी के पास राकेश शर्मा (ब्राह्मण चेहरा), गौरव जैन, डॉ. सत्येंद्र और पूर्व प्रत्याशी सौरभ स्वरूप बंसल जैसे दावेदार मैदान में डटे हैं। इनके अलावा आजाद समाज पार्टी के परवेज़ आलम व मनोज पंवार, एआईएमआईएम के मोहम्मद इंतजार अंसारी और बहुजन समाज पार्टी के संभावित उम्मीदवार भी सक्रिय हैं। कुल मिलाकर यदि आगामी चुनाव में बसपा, एआईएमआईएम या आजाद समाज पार्टी के कारण मुस्लिम और दलित वोटों का बिखराव होता है, तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा, लेकिन यदि सपा एक मजबूत चेहरा उतारकर विपक्ष को एकजुट करती है तो मुकाबला कड़ा हो सकता है , हालांकि फिलहाल गठबंधन और सत्ता पक्ष के प्रभाव से भाजपा का पलड़ा सबसे भारी दिख रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भयमुक्त कानून-व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर के रिकॉर्ड विस्तार और जन-कल्याणकारी योजनाओं के दम पर भाजपा 2027 के चुनाव में 'सुरक्षा और विकास' के मुद्दे पर जनता के बीच पूर्ण बहुमत की ओर मजबूती से बढ़ रही है।

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