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यूपी में तीन नए एक्सप्रेसवे को मंजूरी

विधानसभा चुनाव से पहले तीन नए एक्सप्रेसवे के निर्माण से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और संपर्क को मिलेगी अभूतपूर्व शक्ति।

उत्तर प्रदेश को देश के सबसे आधुनिक और सुदृढ़ एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाले राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक और अत्यंत ऐतिहासिक और महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य सरकार ने तीन नई विशाल एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू करने की अपनी रणनीतिक तैयारियां बेहद तेज कर दी हैं। इसके अंतर्गत प्रस्तावित मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसी महा-परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की विधिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी ला दी गई है। राज्य सरकार ने इस संबंध में सभी संबंधित जिलाधिकारियों को अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि का सत्यापन कार्य पूरी प्राथमिकता के साथ जल्द से जल्द संपन्न करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। इन दूरदर्शी परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से प्रदेश के पश्चिमी, पूर्वी और मध्य हिस्सों के बीच सड़क संपर्क का एक नया और अभेद्य जाल तैयार होगा, जो आने वाले समय में राज्य के चहुंमुखी विकास की रीढ़ साबित होगा।

सांगठनिक और बुनियादी सशक्तिकरण के इसी क्रम में लगभग 150 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे उत्तराखंड से जोड़ने में गेम-चेंजर साबित होने जा रहा है। यह आधुनिक मार्ग मेरठ, अमरोहा, बिजनौर और हरिद्वार जिलों के तकरीबन 185 गांवों से होकर गुजरेगा, जिसके लिए प्रशासन द्वारा लगभग 2000 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना सुनिश्चित हुआ है। इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी रणनीतिक खूबी यह होगी कि इसे सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच न केवल आवागमन अत्यंत सुगम और तीव्र होगा, बल्कि इस पूरे कॉरिडोर में व्यापारिक गतिविधियों को भी नया विस्तार मिलेगा। केंद्र और राज्य सरकार की इस अनूठी पहल से जहां एक ओर आम जनता को विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी की सौगात मिलेगी, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक और आर्थिक समृद्धि के नए द्वार भी खुलेंगे।

इसके साथ ही, विंध्य क्षेत्र के समग्र आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए लगभग 330 किलोमीटर लंबे विंध्य एक्सप्रेसवे की कार्ययोजना को भी मिशन मोड पर आगे बढ़ाया गया है। यह विशाल एक्सप्रेसवे प्रयागराज, भदोही, मीरजापुर और सोनभद्र जैसे रणनीतिक व औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिलों के लगभग 341 गांवों से होकर गुजरेगा, जिसके लिए करीब 4600 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा रही है। प्रयागराज में इस एक्सप्रेसवे का सीधा संपर्क गंगा एक्सप्रेसवे से सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे विंध्य क्षेत्र के सुदूर और जनजातीय इलाकों की राजधानी लखनऊ और देश की राजधानी दिल्ली तक सीधी और सुगम पहुंच स्थापित हो जाएगी। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए लगभग 130 किलोमीटर लंबे विंध्य-पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का खाका खींचा गया है, जो गाजीपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा और गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी व मीरजापुर के करीब 135 गांवों को जोड़ते हुए क्षेत्र की कनेक्टिविटी को एक सर्वथा नया आयाम प्रदान करेगा।

स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह के अनुसार, इन तीनों महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे से जुड़े सभी जनपदों के जिलाधिकारियों को विस्तृत भूमि अधिग्रहण प्लान प्रेषित कर दिया गया है और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य को तीव्र गति से प्रारंभ करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान समय में जेवर लिंक एक्सप्रेसवे सहित चार अन्य महत्वपूर्ण लिंक एक्सप्रेसवे के लिए भी भूमि अधिग्रहण की प्रशासनिक कार्यवाही समानांतर रूप से गतिमान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुदृढ़ व पारदर्शी सुशासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षित व समृद्ध भारत के साझा विजन से संचालित ये परियोजनाएं न केवल उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश, कृषि विकास और धार्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन को एक ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाएंगी, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव में विकास और सुशासन के इसी सफल मॉडल के दम पर भाजपा और एनडीए गठबंधन के पक्ष में एक अभूतपूर्व व सकारात्मक माहौल तैयार कर जनता के भारी और पूर्ण जनसमर्थन की राह को और अधिक सशक्त बनाएंगी।

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