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यूपी भाजपा में जल्द होगा 17वें प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान

खरमास से पहले यूपी भाजपा को नया नेतृत्व मिलने की उम्मीद है, जिसमें कई बड़े नाम रेस में हैं और पार्टी का ध्यान हिंदुत्व और महिला नेतृत्व पर केंद्रित हो सकता है।

भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश में जल्द ही अपने 17वें प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा करने की तैयारी में है। चुनाव अधिकारी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल लखनऊ पहुंचकर चुनावी औपचारिकताएं पूरी कर नाम का ऐलान करेंगे। लखनऊ से दिल्ली तक चर्चा है कि 16 दिसंबर को 'खरमास' लगने से पहले ही नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा हो जाएगी। पार्टी के संगठनात्मक चुनाव के तहत 98 में से 84 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पहले ही हो चुकी है, और अब सबकी निगाहें प्रदेश के नए मुखिया पर टिकी हैं। नया अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का भरोसेमंद होने के साथ ही राजनीतिक सूझबूझ वाला होगा। वह केंद्रीय नेतृत्व की अपेक्षाओं को पूरा करने, सरकार के साथ स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय बिठाने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की क्षमता रखेगा।

प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में कई दिग्गज नेता शामिल हैं, जिनमें उपमुख्यमंत्रियों में केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, योगी सरकार के मंत्रियों में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह शामिल हैं। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और पंकज चौधरी भी दौड़ में बताए जा रहे हैं। अन्य वरिष्ठ दावेदारों में पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा, राज्यसभा सदस्य बाबूराम निषाद, अमरपाल मौर्य, गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा, हरीश द्विवेदी, पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा, एमएलसी विद्यासागर सोनकर, पूर्व मंत्री रामशंकर कठेरिया और साध्वी निरंजन ज्योति का नाम प्रमुख है। साध्वी निरंजन ज्योति का नाम चर्चा में आने से यह अटकलें लग रही हैं कि पार्टी हिंदुत्व के एजेंडे को मजबूत करने के साथ ही महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाकर इसे एक "ट्रम्प कार्ड" के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है, जिससे 'भगवा आंदोलन' को नई धार मिल सकती है।

भाजपा के इतिहास पर नज़र डालें तो उत्तर प्रदेश के पहले प्रदेश अध्यक्ष माधव प्रसाद त्रिपाठी रहे, जिन्होंने 1980 से 1984 तक पद संभाला। इसके बाद कल्याण सिंह (1984-1990), राजेंद्र कुमार गुप्ता (1990-1991), और कलराज मिश्र (1991-1997 और फिर 2000-2002) जैसे कद्दावर नेताओं ने संगठन का नेतृत्व किया। राजनाथ सिंह (1997-2000) ने भी यह जिम्मेदारी निभाई। 2000 में ओमप्रकाश सिंह, 2002 से 2004 तक विनय कटियार, 2004 से 2007 तक केसरी नाथ त्रिपाठी, और 2007 से 2010 तक रमापति राम त्रिपाठी अध्यक्ष रहे। इसके बाद सूर्य प्रताप शाही (2010-2012) और लक्ष्मीकांत बाजपेयी (2012-2016) ने कमान संभाली। हाल के वर्षों में, केशव प्रसाद मौर्य (2016-2017), डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय (2017-2019), और स्वतंत्र देव सिंह (2019-2022) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जबकि वर्तमान में अगस्त 2022 से भूपेंद्र सिंह चौधरी इस पद पर कार्यरत हैं।

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