

ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने वाली बीसी सखी योजना के मामले में उत्तर प्रदेश ने पूरे देश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। मई 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी पहल ने आज प्रदेश के गांवों का वित्तीय परिदृश्य पूरी तरह बदल दिया है। इस योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 40 हजार महिलाएं बैंकिंग संवाददाता के रूप में प्रशिक्षित होकर दूरदराज के समुदायों और औपचारिक बैंकिंग सेवाओं के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रही हैं। उत्तर प्रदेश के बाद इस सूची में मध्य प्रदेश दूसरे और राजस्थान तीसरे स्थान पर है, जो इस योजना की व्यापक सफलता को दर्शाता है।
बीसी सखियां न केवल ग्रामीणों के घरों तक पैसे जमा करने, निकालने और नए खाते खोलने जैसी सुविधाएं पहुंचा रही हैं, बल्कि पेंशन और किसान सम्मान निधि जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ भी लाभार्थियों तक सीधे पहुंचाने में मदद कर रही हैं। आर्थिक दृष्टि से भी यह मॉडल अत्यंत सफल सिद्ध हुआ है, जहां ये महिलाएं औसतन 10 से 15 हजार रुपये प्रति माह कमा रही हैं, वहीं कुछ सक्रिय बीसी सखियां तो 50 हजार रुपये तक का मासिक कमीशन अर्जित कर रिकॉर्ड बना रही हैं। लखनऊ की अनीता पाल और सुल्तानपुर की प्रियंका जैसी महिलाएं इस बदलते उत्तर प्रदेश की जीवंत तस्वीरें पेश कर रही हैं।
इस कार्यक्रम की बढ़ती विश्वसनीयता और सफलता को देखते हुए अब भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ-साथ पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक और केनरा बैंक जैसे बड़े संस्थान भी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ जुड़ गए हैं। सरकार द्वारा दिए जा रहे छह महीने के मानदेय और आधुनिक माइक्रो एटीएम उपकरणों ने इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान की है। यह मॉडल न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे ग्रामीण भारत के लिए समावेशी विकास और आर्थिक लचीलेपन का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।