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बिहार विधानसभा शीतकालीन सत्र-2024

बिहार विधानसभा का पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र 25-29 नवंबर को हुआ, जिसमें 32,506 करोड़ रुपये का द्वितीय अनुपूरक बजट सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए।

बिहार विधानसभा का पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र आज समाप्त हो गया। इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण सत्र में कई विधेयक पारित किए गए और कई मुद्दों पर गरमागरम बहस हुई।

सत्र की शुरुआत 25 नवंबर को राज्यपाल के अभिभाषण के साथ हुई। इसके बाद हाल ही में हुए उपचुनावों में जीते चार नए विधायकों ने शपथ ली। भाजपा के दो, जदयू के एक और हम पार्टी के एक विधायक शामिल हुए, जिससे एनडीए गठबंधन को मजबूती मिली।

विधानसभा ने तीन संशोधन विधेयक, बेतिया राज की भूमि अधिग्रहण से संबंधित एक विधेयक और वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 32,506 करोड़ रुपये का द्वितीय अनुपूरक बजट पारित किया। संविधान के संस्कृत और मैथिली में अनुवाद के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को धन्यवाद देने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।

सत्र में कई विवादास्पद मुद्दों पर तीखी बहस हुई। स्मार्ट प्रीपेड मीटर का मुद्दा गरमाया, जिस पर विपक्ष ने सरकार को घेरा। कांग्रेस विधायक अजीत शर्मा ने औसत बिलिंग प्रथाओं पर चिंता जताई, जिसे ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने खारिज कर दिया।

भूमि सर्वेक्षण, 65 प्रतिशत आरक्षण और वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक जैसे मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई। विपक्ष ने इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जिससे कई बार सदन की कार्यवाही बाधित हुई।

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने घोषणा की कि पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में नवनिर्मित 500 बिस्तरों वाला अस्पताल दिसंबर में उद्घाटन के लिए तैयार है। यह घोषणा राज्य के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में सुधार की दिशा में एक प्रमुख कदम है। 

इस सत्र की एक विशेषता यह रही कि लंबे समय बाद प्रश्नकाल सुचारू रूप से चला। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने इसे सकारात्मक बताया। कांग्रेस विधायक प्रतिमा कुमारी ने कहा, "जनता के सवालों को लेकर विपक्ष सतर्क था।" वहीं भाजपा विधायक आलोक रंजन ने कहा, "हम चाहते थे कि जनता की समस्याएं दूर हों, इसलिए प्रश्नकाल चलने दिया।"

राजनीतिक विश्लेषक प्रिय रंजन भारती ने कहा, "अगले साल चुनाव है, इसलिए सभी विधायक जनता के सवालों को लेकर चिंतित थे। यही कारण था कि प्रश्नकाल सुचारू रूप से चला।"

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बीच सदन में हुए संवाद ने भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना।

कुल मिलाकर, यह सत्र विधायी कार्यों और राजनीतिक बहसों का एक संतुलित मिश्रण रहा। हालांकि कई मुद्दों पर मतभेद दिखे, लेकिन महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने में सफलता मिली। अब सभी की नजरें आगामी चुनावों पर टिकी हैं, जिनके लिए सभी दल अपनी रणनीतियां तैयार कर रहे हैं।

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