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बंगाल की शिक्षा और परिवहन व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन

महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान बनेगा पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा, सार्वजनिक परिवहन को मिली भगवा-सफेद रंग में नई पहचान।

पश्चिम बंगाल की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान को नई पीढ़ी के समक्ष वास्तविक रूप में प्रस्तुत करने के लिए राज्य सरकार ने अकादमिक और प्रशासनिक स्तर पर कई ऐतिहासिक एवं युगांतकारी नीतिगत निर्णयों का क्रियान्वयन प्रारंभ कर दिया है। भारतीय जनसंघ के दूरदर्शी संस्थापक, प्रखर शिक्षाविद् और महान राष्ट्रभक्त डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पावन जयंती के उपलक्ष्य में यह घोषणा की गई है कि आगामी नए शैक्षणिक सत्र से राज्य के स्कूली स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के पाठ्यक्रमों में उनके अविस्मरणीय योगदान को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। इस नवोन्मेषी नीतिगत पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को बंगाल के ऐतिहासिक गठन, अखंड भारत की उदात्त अवधारणा, संसद में देश की संप्रभुता के लिए दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषणों के साथ-साथ केंद्र सरकार के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री और कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति के रूप में किए गए उनके युगांतकारी कार्यों से विस्तृत रूप से परिचित कराया जाएगा।

शिक्षा के क्षेत्र में इस गुणात्मक सुधार के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को भी शीर्ष प्राथमिकता प्रदान की जा रही है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के छात्र जीवन और बाद के वर्षों में उनके कुशल प्रबंधन से जुड़े रहे ऐतिहासिक मित्रा इंस्टीट्यूशन के कायाकल्प और नवीनीकरण के लिए मुख्यमंत्री क्षेत्रीय विकास निधि से 25 लाख रूपए की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त, इस ऐतिहासिक विद्यालय की समृद्ध विरासत को अक्षुण्ण रखते हुए इसके आधुनिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसे केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम श्री' योजना में सम्मिलित करने का विशेष अनुरोध भी प्रेषित किया गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन दूरगामी परिवर्तनों से न केवल युवाओं को अपने राज्य के वास्तविक निर्माताओं के गौरवमयी इतिहास को जानने का सुअवसर प्राप्त होगा, बल्कि यह कदम अकादमिक क्षेत्र में एक नई राष्ट्रीय चेतना और बौद्धिक चेतना का सूत्रपात भी करेगा।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकीकरण का यह नव-परिवर्तन केवल शिक्षा क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में भी एक सर्वथा नई और विशिष्ट दृश्य पहचान के रूप में धरातल पर दिखाई देने लगा है। पश्चिम बंगाल परिवहन निगमों के बेड़े में शामिल सरकारी बसों को अब एक नई रंग योजना के तहत आकर्षक भगवा और सफेद रंग के संयोजन में संचालित किया जा रहा है। इस आधुनिक रंग योजना का विधिवत शुभारंभ हाल ही में सोनारपुर से न्यूटाउन के इको स्पेस के मध्य संचालित की गई अत्याधुनिक वातानुकूलित बस सेवा के माध्यम से हुआ है, जिसे यात्रियों से अत्यंत उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। इसके समानांतर, दक्षिण 24 परगना के घटकपुर से हावड़ा के सांतरागाछी कॉरिडोर के बीच संचालित निजी बस सेवाओं में भी इसी समरूप रंग विन्यास को अपनाया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए जारी होने वाले ई-टिकटों के डिजिटल वॉटरमार्क को भी पूरी तरह से परिवर्तित कर दिया गया है, जो इस व्यवस्था के क्रमिक कायाकल्प को दर्शाता है।

राज्य के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, सार्वजनिक वाहनों में किया जा रहा यह नीतिगत बदलाव केवल बाहरी आवरण या रंग के परिवर्तन तक सीमित नहीं है, अपितु यह राज्य में पर्यावरण-अनुकूल, पूर्णतः आधुनिक और जन-केंद्रित सार्वजनिक परिवहन के एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत का जीवंत प्रतीक है। सरकार का मुख्य ध्यान इस समय बसों के तकनीकी सुदृढ़ीकरण, सेवाओं की समयबद्धता और यात्रियों की यात्रा को अत्यधिक सुगम व सुरक्षित बनाने पर केंद्रित है। केंद्र सरकार की लोककल्याणकारी नीतियों और राज्य प्रशासन के सुदृढ़ व पारदर्शी सुशासन के इस साझा एवं गतिशील मॉडल से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि पश्चिम बंगाल में विकास और व्यवस्था सुधार के इस नए सफर को जनमानस का व्यापक और पूर्ण समर्थन मिल रहा है, जो आने वाले समय में राज्य को चौमुखी प्रगति और आर्थिक स्वावलंबन के पथ पर अग्रसर करने की राह को बेहद सुगम और मजबूत बनाने जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत राष्ट्रीय विजन और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सुदृढ़ व पारदर्शी सुशासन के इस साझा मॉडल से जनता में भारी उत्साह है, जिससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि बंगाल की जनता विकास और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के इस नए सफर को जारी रखने के लिए वर्तमान सरकार को अपना ऐतिहासिक व पूर्ण समर्थन देने जा रही है।

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