केन-बेतवा लिंक परियोजना पर CM मोहन यादव की समीक्षा

खजुराहो में मुख्यमंत्री ने केन-बेतवा लिंक परियोजना की प्रगति और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को प्रभावित परिवारों की समस्याएं घर-घर जाकर सुनने के निर्देश दिए।
केन-बेतवा लिंक परियोजना पर CM मोहन यादव की समीक्षा
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केन-बेतवा परियोजना की प्रगति और पुनर्वास की समीक्षा

बुंदेलखंड के विकास और जल संकट के समाधान के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खजुराहो में समीक्षा बैठक की। बैठक में परियोजना की प्रगति के साथ प्रभावित गांवों और परिवारों के पुनर्वास से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना से प्रभावित परिवारों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझा जाए और पुनर्वास प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रयास होना चाहिए कि प्रभावित लोगों को पुनर्वास के दौरान अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

केन-बेतवा परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट को केन-बेतवा लिंक परियोजना की नियमित और उच्च प्राथमिकता के साथ मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने परियोजना से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को भी कहा, ताकि निर्माण, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और अन्य प्रक्रियाओं में किसी तरह की देरी न हो। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से परियोजना से संबंधित लंबित मामलों का समय पर समाधान करने और प्रगति की नियमित समीक्षा करने को कहा। समीक्षा बैठक में भाजपा सांसद वी.डी. शर्मा, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार सहित पन्ना, छतरपुर, बिजावर और राजनगर के विधायक तथा अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

प्रभावित गांवों में घर-घर संवाद

मुख्यमंत्री ने पन्ना और छतरपुर जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारी केवल कार्यालयों में बैठकर लोगों की समस्याओं का आकलन न करें बल्कि प्रभावित गांवों में जाकर घर-घर परिवारों से संवाद करे और उनकी वास्तविक स्थिति को समझे। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याएं सुनने से पुनर्वास और सहायता से जुड़े मामलों का बेहतर और व्यावहारिक समाधान किया जा सकेगा। डॉ. मोहन यादव ने प्रभावित गांवों में रहने वाले जनजातीय परिवारों की समस्याओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी जरूरतों, आजीविका, पुनर्वास और अन्य परेशानियों को प्राथमिकता के आधार पर समझा जाए।

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