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फर्जी सिम और डिजिटल फ्रॉड पर केंद्र सरकार की सख्ती

केंद्र सरकार ने नया सिम लेने के नियम बेहद सख्त कर दिए हैं। अब डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के जरिए तय सीमा से अधिक कनेक्शन रखने वालों की रियल टाइम पहचान कर अतिरिक्त सिम निलंबित किए जाएंगे।

साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने नया सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को अधिक कड़ा कर दिया है। अब डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के जरिए रियल टाइम में ऐसे ग्राहकों की पहचान की जाएगी जिनके नाम पर तय सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन चालू हैं। नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति देश भर की सभी टेलीकॉम कंपनियों को मिलाकर अधिकतम नौ मोबाइल कनेक्शन रख सकता है, जबकि जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर के क्षेत्रों में यह सीमा छह कनेक्शन की है। वर्तमान में अलग-अलग कंपनियों में सिम की कुल संख्या पहचानना कठिन था, लेकिन नए प्रावधानों के तहत ग्राहकों को तय सीमा से अधिक वाले अतिरिक्त नंबर अनिवार्य रूप से बंद कराने होंगे।

इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से लागू करने के लिए दूरसंचार विभाग ने चरणबद्ध योजना बनाई है। इसके तहत मोबाइल कंपनियां ग्राहक द्वारा सिम लेने के अगले दिन या कनेक्शन बुकिंग और एक्टिवेशन के समय ही रियल टाइम जांच करेंगी। डीआईपी पर सभी टेलीकॉम कंपनियों से प्राप्त ग्राहकों का डाटा एकत्र किया जाएगा, जिससे एक व्यक्ति के सभी कनेक्शनों का ब्योरा एक जगह समूहित हो सकेगा। जिन ग्राहकों के नाम पर अधिकतम सीमा पूरी हो चुकी है, उनकी फोटो डीआईपी पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिसे कंपनियों को नया सिम जारी करते समय प्रतिदिन जांचना होगा।

जब तक यह रियल टाइम जांच प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावी नहीं हो जाती, तब तक सीमा से अधिक सक्रिय सभी कनेक्शनों को निलंबित रखा जाएगा। यह निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक कि अतिरिक्त नंबर बंद नहीं हो जाते। यह नियम केवल नए ग्राहक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें टेलीकॉम कंपनियों की भी पूरी जवाबदेही तय की गई है। कंपनियों के लिए ग्राहक का डाटा डीआईपी पर अनिवार्य रूप से भेजना तय किया गया है, ताकि फर्जी सिम और डिजिटल फ्रॉड के नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।

केंद्र सरकार के इस कड़े निर्णय से भारतीय नागरिकों को डिजिटल फ्रॉड और साइबर अपराधों से बड़ी सुरक्षा मिलेगी, जिससे उनका व्यक्तिगत डाटा और बैंक खाता दोनों सुरक्षित रहेंगे।

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