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7 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा का आरम्भ

वर्ष 2024 में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा का आयोजन 7 जुलाई 2024 से आरम्भ किया जा रहा हैं।

इस वर्ष 2024 में भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की भव्य रथ यात्रा का आयोजन 7 जुलाई 2024 से आरम्भ किया जा रहा हैं। पंचांग के अनुसार भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 7 जुलाई को सुबह 4 बजकर 26 मिनट से प्रारंभ होगी। जबकि यात्रा 8 जुलाई को सुबह 4 बजकर 59 मिनट पर समाप्त होगी।

7 जुलाई को प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा  तीन चरणों (3 Phases) में निकाली जाएगी। यात्रा का प्रथम चरण प्रातः  8 बजकर 5 मिनट से 9 बजकर 27 मिनट तक, द्वितीय चरण दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से 1 बजकर 37 मिनट तक, एवं तृतीय चरण शाम 4 बजकर 39 मिनट से 6 बजकर 01 मिनट तक होगा। इन तीनों चरणों के दौरान श्रद्धालु प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन कर स्वयं को कृतार्थ कर सकेंगे।

श्री जगन्नाथ मन्दिर ओडिशा (Odisha) राज्य के तटवर्ती शहर पुरी (Puri) में स्थित है। यह हिन्दू मंदिर भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पित है। जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोई के रूप में प्रसिद्ध हैं। जगन्नाथ मंदिर के प्रसाद को ‘महाप्रसाद’ कहा जाता हैं।

मान्यताओं के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा रथ में बैठकर अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर में जाते हैं।  गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर कहा जाता हैं।  गुंडिचा मंदिर में तीनों भाई-बहन 7  दिनों तक विश्राम करते हैं। तत्पश्चात आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा को पुनः जगन्नाथ मंदिर में स्थापित किया जाता है। ओडिशा (Odisha) के पुरी (Puri) के जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple)  में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र (बलराम) व बहन सुभद्रा के साथ विराजमान होते हैं। भगवान जगन्नाथ ,बलराम व  सुभद्रा जी की प्रतिमाओं को रथ में विराजित कर पूरे नगर में भ्रमण कराया जाता हैं।

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन यह भव्य यात्रा आयोजित की जाती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ अपने निवास स्थान पर देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi ) से पहले लौट आते हैं एवं इसके पश्चात प्रभु श्री हरि 4  माह तक विश्राम के लिए चले जाते हैं। 7 जुलाई को विभिन्न राज्यों में इस दिन मेले का आयोजन कर प्रभु जगन्नाथ (Lord Jagannath) की यात्रा निकाली जाती हैं।

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