क्लॉड एआई मॉडल बनाने वाली अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक ने सार्वजनिक होने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी ने 26 अक्टूबर को अमेरिकी बाजार नियामक SEC के पास फॉर्म S-1 दाखिल किया और नैस्डैक ग्लोबल सेलेक्ट मार्केट पर ANT टिकर के तहत सूचीबद्ध होने के लिए आवेदन किया।
कंपनी ने जून 2026 में गोपनीय रूप से दस्तावेज जमा किए थे। सोमवार को सार्वजनिक हुआ यह दस्तावेज पहली बार उसके वित्तीय आंकड़े सामने लाया है। आवेदन में गोल्डमैन सैक्स और मॉर्गन स्टेनली प्रमुख बैंकों के रूप में शामिल हैं।
कमाई और घाटे की दो अलग तस्वीरें
दस्तावेज के मुताबिक 30 जून 2026 को खत्म हुई छमाही में कंपनी का राजस्व 16.29 अरब डॉलर रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 1.16 अरब डॉलर था। पूरे 2025 में कंपनी ने 4.59 अरब डॉलर कमाए थे।
इसी छमाही में शुद्ध घाटा 80.75 अरब डॉलर दर्ज हुआ। इसमें 72.4 अरब डॉलर का गैर-नकदी शुल्क शामिल है, जो परिवर्तनीय नोट और इसी तरह के साधनों का मूल्य बढ़ने से आया। कारोबारी स्तर पर परिचालन घाटा 69.3 करोड़ डॉलर रहा और दूसरी तिमाही में 97.4 करोड़ डॉलर का परिचालन लाभ दर्ज हुआ।
मूल्यांकन पर तस्वीर अभी अधूरी
दस्तावेज में शेयरों की संख्या और मूल्य दायरा खाली छोड़ा गया है, इसलिए लिस्टिंग का मूल्यांकन तय नहीं है। मई 2026 के निजी दौर में कंपनी का मूल्यांकन 965 अरब डॉलर आंका गया था। मीडिया रिपोर्टों में 1.5 से 2 लाख करोड़ डॉलर के मूल्यांकन की चर्चा है, पर यह आंकड़ा दस्तावेज में नहीं है।
93 पन्नों में जोखिम की चेतावनी
CNN की रिपोर्ट के अनुसार जोखिम वाला हिस्सा 93 पन्नों का है, जो स्नैप और उबर जैसी कंपनियों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। कंपनी ने दुरुपयोग, मानव नियंत्रण खोने, निगरानी और आर्थिक उथल-पुथल को प्रमुख श्रेणियों में रखा है। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि बहुत तेज गति सुरक्षा इंतजामों से आगे निकल सकती है।
दस्तावेज के अनुसार सुरक्षा चिंताओं के चलते एक अगली पीढ़ी के मॉडल का प्रशिक्षण एक महीने से अधिक रोका गया था। शीर्ष पांच ग्राहक अकेले करीब 25% राजस्व देते हैं।
लिस्टिंग ऐसे समय आ रही है जब एआई क्षेत्र में लगी पूंजी और उस पर रिटर्न को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक ओपनएआई ने अपनी लिस्टिंग अगले साल तक टाल दी है।
भारत से जुड़ा पक्ष
कंपनी के मुताबिक भारत क्लॉड का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। एंथ्रोपिक ने 16 फरवरी 2026 को बेंगलुरु में अपना पहला भारतीय दफ्तर खोला, जिसकी कमान माइक्रोसॉफ्ट इंडिया की पूर्व प्रबंध निदेशक इरीना घोष के पास है। कंपनी का कहना है कि भारत में करीब आधा इस्तेमाल सॉफ्टवेयर और कोडिंग से जुड़े कामों में होता है।
फरवरी में कंपनी के नए टूल आने के बाद भारतीय IT शेयरों में बड़ी गिरावट आई थी, हालांकि इंफोसिस के साथ साझेदारी की घोषणा के बाद इन शेयरों में सुधार दिखा। भारतीय निवेशक इस लिस्टिंग में सीधे हिस्सा नहीं ले सकते, पर उदारीकृत प्रेषण योजना और गिफ्ट सिटी के रास्ते अमेरिकी शेयरों तक पहुंच बनी रहती है।
लिस्टिंग की तारीख और कीमत अभी तय नहीं है। आगे की तस्वीर इस पर निर्भर करेगी कि निवेशक एआई में लगी पूंजी को किस भाव पर आंकते हैं।