Science and Technology

अब सिर्फ चैटबॉट नहीं,सीधे एक्शन लेंगे गूगल के ऑटोनॉमस एआई एजेंट्स।

गूगल अब ऑटोनॉमस एआई एजेंट्स, जेमिनी 3.5 फ्लैश, स्मार्ट ग्लासेस और नए टीपीयू चिप्स लाकर साधारण सर्च को एक स्मार्ट आंसर इंजन बना रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया अब सिर्फ चैटबॉट और टेक्स्ट जनरेट करने तक सीमित नहीं रह गई है। गूगल के हालिया टेक इवेंट ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि तकनीक का अगला चरण पूरी तरह ऑटोनॉमस एजेंट्स के नाम होगा। ये उन्नत एजेंट्स आपके लिए खुद योजना बनाएंगे, जटिल कोडिंग करेंगे, अपॉइंटमेंट बुक करेंगे और आपके सभी डिजिटल काम बिना रुके निपटाएंगे।

गूगल का ध्यान अब केवल सवालों के लिखित जवाब देने पर नहीं है, बल्कि सीधे सटीक एक्शन लेने पर केंद्रित है। इस रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण नया जेमिनी 3.5 फ्लैश मॉडल है। यह विशेष मॉडल लंबे, जटिल और कई चरणों वाले बड़े प्रोजेक्ट्स को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है।

बाजार में मौजूद अन्य मॉडल्स की तुलना में जेमिनी 3.5 फ्लैश चार गुना ज्यादा तेज है। इसके साथ ही गूगल ने 'एंटी-ग्रेविटी 2.0' भी पेश किया है, जो सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का तरीका पूरी तरह बदल देगा। आप कई एआई एजेंट्स को एक साथ काम पर लगाकर मात्र 12 घंटों में एक पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा, 'जेमिनी स्पार्क' के जरिए गूगल वर्कस्पेस अब एक सक्रिय सहायक बन गया है। यह 24 घंटे बैकग्राउंड में आपके जीमेल और कैलेंडर स्कैन करेगा, जरूरी जानकारी निकालेगा और मीटिंग्स के लिए खुद डॉक्स तैयार करेगा।

सॉफ्टवेयर से आगे बढ़कर गूगल ने हार्डवेयर में भी शानदार छलांग लगाई है। नए एंड्रॉइड एक्सआर (XR) स्मार्ट ग्लासेस एआई को मोबाइल स्क्रीन से निकालकर आपकी आंखों के सामने लाते हैं। सैमसंग और क्वालकॉम के साथ मिलकर तैयार किए गए ये स्मार्ट चश्मे आपके सामने मौजूद रियल-वर्ल्ड डेटा को प्रोसेस करके तुरंत अनुवाद या दिशा-निर्देश दे सकते हैं।

इन सभी शक्तिशाली तकनीकों के पीछे गूगल के नए 8वें जनरेशन के टीपीयू (TPU) चिप्स काम कर रहे हैं। टीपीयू 8T बड़े मॉडल्स की ट्रेनिंग के लिए और 8i इन्फरेंस के लिए है। ये नए चिप्स ऊर्जा खपत कम करके छह गुना ज्यादा कंप्यूटिंग पावर देते हैं।

अब गूगल सर्च का पुराना तरीका खत्म हो रहा है। यह अब एक बुद्धिमान 'आंसर इंजन' बन चुका है जो आपके लिए खुद रेस्टोरेंट में फोन करके टेबल बुक कर सकता है। ब्रांड्स के लिए इसका साफ मतलब है कि उन्हें अब सिर्फ पारंपरिक एसईओ नहीं, बल्कि 'आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन' पर निर्भर रहना होगा।

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