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भाजपा की नई पीढ़ी का नेतृत्व करेंगे नितिन नबीन

बिहार की राजनीति से राष्ट्रीय संगठन तक का सफर तय करने वाले नितिन नबीन को भाजपा ने कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।

भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर एक अहम फैसला लेते हुए बिहार सरकार में मंत्री और वरिष्ठ नेता नितिन नबीन सिन्हा को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस फैसले की जानकारी भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने दी। नितिन नबीन को यह जिम्मेदारी ऐसे समय सौंपी गई है जब पार्टी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया की ओर बढ़ रही है। फिलहाल वे इस अंतरिम अवधि में पार्टी की कमान संभालेंगे। 45 वर्ष की उम्र में यह दायित्व मिलने के साथ ही वे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में उभरती नई पीढ़ी के सबसे महत्वपूर्ण चेहरों में शामिल हो गए हैं। यदि भविष्य में उन्हें पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाता है, तो वे भाजपा के इतिहास में सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे।

भाजपा संगठन में नितिन नबीन को शहरी राजनीति की अच्छी समझ रखने वाला नेता माना जाता है। चुनाव के समय वे बूथ स्तर की तैयारी, शहरी वार्डों में छोटी-छोटी योजना बनाने और मिडिल क्लास वोटरों से जुड़ने पर खास ध्यान देते हैं। इसी वजह से पार्टी ने उन्हें सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि दूसरे राज्यों में भी संगठन की जिम्मेदारी दी है।

नितिन नबीन सिन्हा का जन्म 23 मई a1980 को झारखंड की राजधानी रांची में हुआ था। संयोग से यही वह वर्ष है जब भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई थी। वे कायस्थ समुदाय से आते हैं और दिग्गज भाजपा नेता एवं चार बार विधायक रहे स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं। पिता के निधन के बाद वर्ष 2006 में नितिन नबीन ने सक्रिय चुनावी राजनीति में कदम रखा और पटना पश्चिम सीट से उपचुनाव जीतकर पहली बार बिहार विधानसभा पहुंचे। परिसीमन के बाद उन्होंने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व संभाला और तभी से यह सीट उनकी राजनीतिक पहचान बन गई।

नितिन नबीन सिन्हा लगातार पांच बार बिहार विधानसभा के सदस्य चुने जा चुके हैं। वर्ष 2010, 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने बांकीपुर सीट से जीत दर्ज की। 2020 के चुनाव में उन्होंने भारी अंतर से जीत हासिल की थी, जबकि 2025 के चुनाव में भी उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार को निर्णायक अंतर से हराया। बांकीपुर जैसे शहरी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में लगातार जीत ने उन्हें बिहार भाजपा के सबसे मजबूत और भरोसेमंद नेताओं में स्थापित किया है।

सरकारी जिम्मेदारियों की बात करें तो नितिन नबीन का प्रशासनिक अनुभव भी व्यापक रहा है। वे बिहार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री के रूप में अपनी भूमिका निभा चुके हैं और वर्तमान में भी इसी विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके अलावा वे शहरी विकास एवं आवास तथा विधि विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के मंत्री भी रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में शहरी बुनियादी ढांचे, सड़क परियोजनाओं और आवास से जुड़ी योजनाओं पर खास फोकस देखा गया। उन्हें एक ऐसे मंत्री के रूप में जाना जाता है जो संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर संतुलन बनाकर काम करते हैं।

पार्टी संगठन में भी नितिन नबीन का सफर लगातार आगे बढ़ता रहा है। वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं और बिहार भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने संगठन को मजबूत किया। युवाओं को जोड़ने वाले अभियानों और राष्ट्रीय स्तर की यात्राओं में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। इसके अलावा वे भाजपा के सिक्किम प्रभारी और छत्तीसगढ़ के सह-प्रभारी भी रह चुके हैं, जहां संगठनात्मक विस्तार और चुनावी रणनीति में उनका योगदान रहा।

वर्ष 2017 में उन्होंने कांग्रेस नेता अब्दुल जलील मस्तान के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कराया था, जब एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप लगा था। इस प्रकरण ने उन्हें एक सख्त राजनीतिक रुख रखने वाले नेता के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया था।

दिसंबर 2025 में उन्हें भाजपा संसदीय बोर्ड द्वारा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब जे.पी. नड्डा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और वे फिलहाल केंद्र सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। संगठन में यह बदलाव केवल अंतरिम व्यवस्था नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा के भविष्य के नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। बिहार से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में इतनी कम उम्र में शीर्ष पद तक पहुंचना नितिन नबीन की राजनीतिक स्वीकार्यता और संगठनात्मक क्षमता को दर्शाता है।

वर्ष 2017 में उन्होंने कांग्रेस नेता अब्दुल जलील मस्तान के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कराया था, जब एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप लगा था। इस प्रकरण ने उन्हें एक सख्त राजनीतिक रुख रखने वाले नेता के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया था।

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