Politics

टीएमसी-डीएमके रुख से मजबूत एनडीए, संवैधानिक विधेयक संभव

लोकसभा में संख्या बल बढ़ने की संभावना के बीच परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर सरकार का गणित फिर चर्चा में

मॉनसून सत्र से पहले राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलों ने केंद्र सरकार के लिए महत्वपूर्ण संवैधानिक विधेयकों का रास्ता दोबारा खुलने की चर्चा तेज कर दी है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर कथित असंतोष और कुछ सांसदों के अलग रुख अपनाने की खबरों ने यह संभावना पैदा की है कि भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) लोकसभा में अपना संख्या बल बढ़ा सकता है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि टीएमसी के असंतुष्ट सांसदों का समूह अलग पहचान हासिल कर लेता है और सरकार का समर्थन करता है, तो एनडीए को उन विधेयकों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है जिनके लिए संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। इनमें परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक और महिला आरक्षण विधेयक प्रमुख हैं।

गौरतलब है कि अप्रैल में सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई समर्थन जुटाने में सफल नहीं हो सकी थी। यही कारण था कि 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण से संबंधित प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया। महिला आरक्षण विधेयक भी परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा होने के कारण आगे नहीं बढ़ सका था।

इसी बीच टीएमसी की सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बयान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। उनके अनुसार पार्टी के लगभग 20 सांसदों ने अलग समूह बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी सौंपा गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन सांसदों ने बाद में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर अपनी आगे की रणनीति और केंद्र सरकार को समर्थन देने की संभावना पर चर्चा की।

यदि यह समूह आधिकारिक मान्यता प्राप्त कर लेता है, तो लोकसभा में एनडीए की स्थिति और मजबूत हो सकती है। वर्तमान में सदन की कुल स्वीकृत सदस्य संख्या 543 है, हालांकि कुछ सीटें रिक्त होने के कारण प्रभावी संख्या कम है। इसी वजह से दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा भी घटकर लगभग 360 वोट के आसपास माना जा रहा है।

इस समय एनडीए के पास करीब 293 सांसदों का समर्थन है। टीएमसी के संभावित बागी समूह के जुड़ने से यह संख्या और बढ़ सकती है। साथ ही राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कुछ मुद्दों पर डीएमके सरकार का समर्थन कर सकती है। इसके पीछे कांग्रेस और डीएमके के संबंधों में आई कथित दूरी को एक कारण माना जा रहा है।

यदि डीएमके के सांसद भी किसी विशेष विधेयक पर सरकार के पक्ष में मतदान करते हैं, तो एनडीए का संख्या बल और मजबूत होगा। अप्रैल में हुए मतदान के दौरान सरकार को 298 सांसदों का समर्थन मिला था, जिससे यह संकेत मिला था कि उसे अपने पारंपरिक सहयोगियों से बाहर भी कुछ समर्थन प्राप्त हुआ था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के संभावित अलग गुट और डीएमके के मुद्दा-आधारित समर्थन की स्थिति में सरकार लोकसभा में लगभग 348 वोट तक पहुंच सकती है। इसके बाद बहुमत के लिए आवश्यक शेष समर्थन जुटाने हेतु निर्दलीय सांसदों, छोटे दलों और संभावित क्रॉस-वोटिंग पर नजर रहेगी।

Satheesan’s angioplasty remarks trigger medical community debate

Telangana Police's 2-Week Secret Operation Busts Cybercrime Empire

INS Surya Launched: Indian Navy's New Blue-Water Era

Pakistan Spy Network Busted in Andhra: 2 Arrested, 13 Under Lens

Revenue Dept to survey Kerala University land in AKG Centre row