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जनसांख्यिकी बदलाव पर उच्च स्तरीय समिति सक्रिय

जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में देशव्यापी वैज्ञानिक अध्ययन और सीमावर्ती राज्यों के दौरे की रूपरेखा तैयार।

देश के विभिन्न हिस्सों और विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्ष 2011 की जनगणना के बाद अवैध घुसपैठ, असामान्य बसावट पैटर्न तथा अन्य अस्वाभाविक कारणों से जनसांख्यिकी में हुए बदलावों का वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी कार्यवाहियों को तेज़ कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 26 मई 2026 को गठित 'हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज' के इस समय सक्रिय होने और इसके आगामी दौरों को लेकर रणनीतिक तैयारियां अब अंतिम रूप ले चुकी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी हाल ही में इस उच्च स्तरीय समिति को पूरी गंभीरता के साथ जल्द से जल्द अपनी महत्वपूर्ण सिफारिशें सौंपने का रचनात्मक सुझाव दिया है, जिसके प्रत्युत्तर में समिति ने स्पष्ट किया है कि वे जमीनी स्तर पर जाकर प्रत्यक्ष रूप से वास्तविक व प्रामाणिक जानकारी हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और मध्य प्रदेश के पूर्व लोकायुक्त जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता वाली यह पांच सदस्यीय शक्तिशाली समिति बेहद विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करने जा रही है। इस समिति में देश के वर्तमान जनगणना आयुक्त, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सम्मानित सदस्य व प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि जैसे प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल हैं, जबकि गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (फॉरेनर्स-1) इसके सदस्य सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह उच्च स्तरीय समिति जल्द ही एक विशेष और विस्तृत प्रश्नावली के साथ देश के सबसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों का सघन दौरा शुरू करने जा रही है।

समिति के इस राष्ट्रव्यापी दौरे को अत्यधिक सार्थक, परिणामोन्मुख और संवादपरक बनाने के लिए विभिन्न राज्यों के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) और संबंधित विभागों को एक व्यापक एवं विस्तृत प्रश्नावली भेजी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, राज्यों से इन आवश्यक जानकारियों, आंकड़ों और स्थानीय सुझावों की प्रतिक्रिया मिलते ही समिति के सदस्यों द्वारा पश्चिम बंगाल, असम, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों के सीमावर्ती जिलों, संवेदनशील इलाकों, प्रमुख मेट्रो शहरों तथा औद्योगिक कस्बों के दौरों का वास्तविक खाका खींच लिया जाएगा। इस त्रि-स्तरीय डेटा संकलन (प्रश्नावली, जमीनी दौरा और प्रशासनिक संवाद) के जरिए धार्मिक व सामाजिक समुदायों के स्तर पर हो रहे असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों के पैटर्न को गहराई से समझा जाएगा।

इस वैज्ञानिक अध्ययन का मुख्य केंद्र बिंदु जनसांख्यिकी में आए बदलावों की वास्तविक प्रकृति, उनके अंतर्निहित कारणों और देश पर होने वाले दूरगामी नतीजों का प्रामाणिक विश्लेषण करना है। यह पूरी कवायद सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा, देश की संप्रभुता, कानून-व्यवस्था, आंतरिक सामाजिक संरचना और विशेषकर जनजातीय समाज के अधिकारों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के आकलन से जुड़ी है। इसके साथ ही, यह समिति देश के भीतर अवैध घुसपैठियों की सटीक पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने तथा उनके सुरक्षित निर्वासन के लिए एक सुदृढ़ व स्थायी विधिक व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करेगी। जनसंख्या स्थिरीकरण और सीमाओं के अधिक सुचारू प्रबंधन के लिए एक स्थायी संस्थागत तंत्र की मजबूत सिफारिश करना भी इस राष्ट्रीय अभियान का अभिन्न हिस्सा है, जो आने वाले समय में देश की आंतरिक अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने में एक युगांतकारी और दूरदर्शी कदम साबित होगा।

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