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बिहार: सिनेमा का नया अध्याय

नीतीश सरकार की नई फिल्म नीति से अब बिहार के कोने-कोने में गूंजेगी ‘लाइट, कैमरा और एक्शन’ की गूंज।

बिहार की धरती अब केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक सिनेमा के एक बड़े केंद्र के रूप में भी पहचानी जाएगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व विजय सिन्हा के साझा प्रयासों से राज्य सरकार ने बिहार को सिनेमाई नक्शे पर मुख्यधारा में लाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है। राज्य की पहली फिल्म सिटी का निर्माण किसी पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि सीधे फिल्म निर्माताओं के सुझावों और उनकी तकनीकी जरूरतों के आधार पर किया जा रहा है। सरकार ने इसके लिए बाकायदा निर्माताओं से प्रस्ताव मांगे हैं, ताकि स्टूडियो से लेकर पोस्ट-प्रोडक्शन और आउटडोर लोकेशन्स तक, सब कुछ विश्व स्तरीय मानकों के अनुरूप हो। एनडीए सरकार की यह पहल दर्शाती है कि राज्य अब केवल प्रतिभाएं देने वाला प्रदेश नहीं, बल्कि प्रतिभाओं को मंच देने वाला गंतव्य भी बन रहा है।

सिनेमा के साथ-साथ रंगमंच की दुनिया को नई ऊंचाइयां देने के लिए ‘बिहार फिल्म एवं ड्रामा संस्थान’ की स्थापना को मिली सैद्धांतिक मंजूरी एक क्रांतिकारी कदम है। लंबे समय से बिहार के प्रतिभावान युवाओं को अभिनय और फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखने के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें अपने ही घर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की पेशेवर शिक्षा मिल सकेगी। यह संस्थान न केवल स्थानीय युवाओं के कौशल को निखारेगा, बल्कि उन्हें फिल्म जगत की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक मजबूत सेतु का काम करेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरगामी सोच और भाजपा-जदयू गठबंधन की सक्रियता का ही परिणाम है कि आज बिहार का युवा अपनी कला के दम पर भविष्य संवारने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर फिल्म निर्माण को सुगम बनाने के लिए सरकार जल्द ही एक समर्पित पोर्टल लॉन्च करने जा रही है, जो सिंगल विंडो सिस्टम की तरह काम करेगा। इस पोर्टल के माध्यम से बड़े प्रोडक्शन हाउसों को फिल्म शूटिंग के लिए जरूरी स्वीकृतियां और लोकेशन की बुकिंग करना बेहद आसान हो जाएगा। इससे न केवल फिल्म निर्माण में तेजी आएगी, बल्कि राज्य में पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। जब बड़े बैनर की फिल्में बिहार की लोकेशन्स पर शूट होंगी, तो इससे यहां की खूबसूरती और सांस्कृतिक संपन्नता पूरी दुनिया के सामने आएगी। सरकार का यह कदम साफ तौर पर यह संदेश देता है कि बिहार अब निवेश और रचनात्मकता के लिए सबसे अनुकूल राज्यों की श्रेणी में मजबूती से खड़ा है।

अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास को सहेजने के लिए सरकार ने ‘मुख्यमंत्री गुरु-शिष्य परंपरा योजना’ के जरिए एक और सराहनीय पहल की है। विलुप्त हो रही पारंपरिक कलाओं को बचाने के लिए शुरू की गई इस योजना को लेकर कलाकारों में जबरदस्त उत्साह है, जिसका प्रमाण विभाग को प्राप्त हुए सैकड़ों आवेदन हैं। वरिष्ठ कलाकारों के संरक्षण में नई पीढ़ी को लोक संस्कृति और प्राचीन कला विधाओं का प्रशिक्षण दिलाकर सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आधुनिकता की दौड़ में बिहार की पहचान धुंधली न पड़े। कुल मिलाकर, फिल्म सिटी से लेकर इन सांस्कृतिक योजनाओं तक, बिहार सरकार का यह ‘मास्टरस्ट्रोक’ राज्य के सांस्कृतिक और आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने वाला साबित होगा।

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