मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्तों डॉ. एस. एस. संधू व डॉ. विवेक जोशी की उपस्थिति में नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में आयोजित आयोग की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में तय किया गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें कार्यालय बुलाने के बजाय बीएलओ खुद उनके घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ईसीआई-नेट पर अपलोड करेंगे। इसके साथ ही बेघर, गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों की सुविधा के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों को विशेष कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में राज्यों के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथियों का विस्तार किया गया। दिल्ली के लिए यह समयसीमा बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 और महाराष्ट्र के लिए 12 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। इसके अलावा, फॉर्म 6 के घोषणापत्र को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हरी झंडी दिए जाने की पुष्टि की गई, तथा नए व छूटे हुए मतदाताओं को मतदाता सूची में जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
तकनीकी व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ईसीआई-नेट सिस्टम की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें आईआईटी/आईआईआईटी के स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होंगे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में आईटी से जुड़ी सभी नई पहलों पर निर्णय लेने से पहले अधिकारियों की समिति में चर्चा की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर बैठकों के एजेंडे को पहले साझा करने, अधिकारियों के वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन को तय समय पर पूरा करने और विदेशी यात्राओं के लिए मंजूरी अनिवार्य करने जैसे संगठनात्मक निर्देश भी लागू किए गए हैं।
हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, आयोग के भीतर आईटी प्रभाग के कामकाज और नियंत्रण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर खींचतान की स्थिति बनी थी। डेपुटेशन पर आए एक अधिकारी द्वारा कार्य आवंटन से जुड़े आदेश जारी किए जाने पर विवाद खड़ा हुआ था, जिसके संदर्भ में कैबिनेट सचिव को पत्र भी भेजा गया था। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इस प्रेस नोट में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि कैबिनेट सचिव को लिखा गया वह पत्र किसी नीतिगत मामले या आईटी विभाग के संचालन से संबंधित नहीं था, बल्कि केवल डेपुटेशन पर कार्यरत अधिकारी के कामकाज तक सीमित था। आयोग ने यह भी साफ किया कि उस अधिकारी द्वारा जारी कार्य पुनर्वितरण आदेशों को वास्तव में कभी लागू नहीं किया गया और आईटी प्रभाग पर उप निर्वाचन आयुक्त का प्रशासनिक नियंत्रण एवं निगरानी लगातार बनी रही।