मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और संस्कृति विभाग के अंतर्गत लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित यह चार दिवसीय राष्ट्रीय संगम देश के दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों की लोककला, संस्कृति और खानपान को एक मंच पर लाने का प्रयास है। इस सांस्कृतिक महोत्सव में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, असम, गुजरात, मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, सिक्किम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना सहित 16 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 500 से अधिक जनजातीय कलाकार और शिल्पकार हिस्सा लेकर अपनी समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर का प्रदर्शन करेंगे।
आयोजन के दौरान दर्शकों को विभिन्न राज्यों के पारंपरिक लोकनृत्यों और संगीतमय प्रस्तुतियों का सजीव अनुभव मिलेगा। स्थानीय दर्शकों को गौर माड़िया, करमा, डोमकच, भगोरिया, चेरावा और होजागिरी जैसे दुर्लभ और पारम्परिक नृत्यों की रंगारंग छटा देखने को मिलेगी, जो प्रकृति और जनजीवन के गहरे जुड़ाव को दर्शाते हैं।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ इस उत्सव में हस्तशिल्प और पारंपरिक खानपान को भी प्रमुखता दी जाएगी। शिल्पकारों द्वारा हस्तनिर्मित आभूषण, मिट्टी और धातु के पारंपरिक बर्तन, बांस और काष्ठ की कृतियां तथा प्राकृतिक रेशों से तैयार वस्त्रों की प्रदर्शनियां और दुकानें लगाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक जनजातीय खानपान के विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे, जिससे शहरवासियों को विभिन्न राज्यों के अनूठे जायके और पोषण से भरपूर देशी व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिलेगा।
यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक मेला नहीं, बल्कि देश के जनजातीय कारीगरों और कलाकारों को प्रत्यक्ष बाजार और पहचान दिलाने की दिशा में एक सशक्त माध्यम साबित होगा। लखनऊ के नागरिकों के लिए यह चार दिन भारत की समृद्ध और विविध जनजातीय विरासत को नजदीक से देखने, समझने और सराहने का एक बेहतरीन अवसर बनकर सामने आएंगे।