मध्य प्रदेश का ग्वालियर शहर भारत की तकनीकी और औद्योगिक प्रगति का एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। हाल ही में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के उद्योग विभाग के बीच देश के पहले 'टेलीकॉम विनिर्माण जोन' की स्थापना के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में हुई यह घोषणा देश को दूरसंचार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और विकसित भारत-2047 के संकल्पों को धरातल पर उतारने का कार्य करेगी।
करीब 350 एकड़ में फैले इस हाईटेक टेलीकॉम जोन को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार 500 करोड़ रूपए की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इस परियोजना के संचालन के लिए एक 'स्पेशल पर्पज व्हीकल' का गठन किया जाएगा, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और केंद्रीय संचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इस जोन की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम' और 'प्लग एंड प्ले' मॉडल है। इसका तात्पर्य यह है कि कंपनियों को बुनियादी सुविधाएं पहले से तैयार मिलेंगी, जिससे वे बिना किसी देरी के अपना उत्पादन शुरू कर सकेंगी। एक ही परिसर में प्रोडक्ट डिजाइनिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट , कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन से लेकर एक्सपोर्ट तक की पूरी वैल्यू चेन उपलब्ध होगी। इससे कंपनियों का समय और लागत दोनों बचेंगे।
आर्थिक और रोजगार के दृष्टिकोण से यह परियोजना मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होने वाली है। इस विनिर्माण जोन में कुल 9,000 करोड़ रूपए से अधिक के निवेश और 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। इसके पहले ही चरण में डिक्सन, एचएफसीएल और तेजस नेटवर्क जैसी प्रमुख दिग्गज टेक कंपनियां लगभग 2,000 करोड़ रूपए का शुरुआती निवेश करने जा रही हैं, जिससे तुरंत 4,500 से अधिक युवाओं को नौकरियां मिलेंगी। इस क्षेत्र में स्मार्टफोन, 5G और आगामी 6G नेटवर्क उपकरण, ऑप्टिकल फाइबर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइसेज, नेटवर्किंग हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर से जुड़े उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाएगा, जो रक्षा, स्वास्थ्य और एआई जैसे क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे।
निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार स्टाम्प ड्यूटी में 100 प्रतिशत रिइम्बर्समेंट और रियायती दरों पर बिजली जैसी विशेष रियायतें दे रही है। इसके अलावा, ग्वालियर की दिल्ली और आगरा से मजबूत रेल व सड़क कनेक्टिविटी इसे लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बेहद मजबूत बनाती है। अब तक इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग का मुख्य केंद्र दक्षिण भारत के राज्यों को माना जाता था, लेकिन इस प्रोजेक्ट के साथ मध्य प्रदेश भी इस दौड़ में मजबूती से शामिल हो गया है। केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से तैयार यह ऐतिहासिक पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत', 'डिजिटल इंडिया' और 'विकसित भारत-2047' के विजन को गति देते हुए भारत को वैश्विक दूरसंचार निर्माण के क्षेत्र में एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करेगी।