आइची-नागोया में 10 स्वर्ण के साथ आठवें पायदान पर भारत

1 अक्टूबर तक भारत 10 स्वर्ण, 22 रजत और 30 कांस्य के साथ पदक तालिका में आठवें स्थान पर है, निशानेबाज़ी, कबड्डी और तीरंदाज़ी ने सोना दिलाया, जबकि एथलेटिक्स ने सबसे ज्यादा पदक जुटाए।
आइची-नागोया में 10 स्वर्ण के साथ आठवें पायदान पर भारत
Published on: 

जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से चल रहे 20वें एशियाई खेलों में 43 खेलों की 469 स्पर्धाओं के बीच भारत के करीब 500 खिलाड़ी उतरे हैं। 4 अक्टूबर के समापन से पहले 1 अक्टूबर तक की तालिका के अनुसार भारत के नाम 10 स्वर्ण, 22 रजत और 30 कांस्य, यानी कुल 62 पदक हैं; ओलंपिक्स डॉट कॉम की तालिका में एक और कांस्य जुड़कर यह संख्या 63 है। भारत आठवें स्थान पर है। सवाल यह है कि 2023 के हांगझोउ में 28 स्वर्ण के साथ चौथे स्थान पर रहे भारत के लिए यह तस्वीर क्या कहती है?

सोने की सूची: दस स्वर्ण कहाँ से आए

पहला स्वर्ण 22 सितंबर को महिला क्रिकेट टीम ने जीता। फाइनल में श्रीलंका को 147 रन से हराया गया और भारत का 216/3 एशियाई खेलों के क्रिकेट का सर्वोच्च टीम स्कोर रहा, जिसमें स्मृति मंधाना ने 79, शेफाली वर्मा ने 48 और रिचा घोष ने नाबाद 49 रन बनाए। 25 सितंबर को कमलजीत और सुरुचि सिंह ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम में स्वर्ण जीता, जो इन खेलों में निशानेबाज़ी का पहला सोना था। अगले दिन कबड्डी में दोहरा खिताब आया: पुरुषों ने ईरान को 40-34 से और महिलाओं ने 37-34 से हराकर अपना ताज बचाया।

29 सितंबर को नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप में स्वर्ण जीता, और वे इस स्पर्धा में एशियाई खेलों का सोना जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उसी स्पर्धा की टीम प्रतियोगिता में उन्होंने मनीषा कीर और आशिमा अहलावत के साथ रजत भी जीता, और बाद में कायनन चेनाई के साथ मिश्रित टीम ट्रैप का स्वर्ण भी भारत के खाते में आया। महिलाओं की 4x400 मीटर रिले टीम (विथ्या रामराज, किरण पहल, पूवम्मा और प्राची चौधरी) ने भी सोना जीता। 30 सितंबर का दिन तीरंदाज़ी के नाम रहा, जब कंपाउंड के तीनों टीम खिताब भारत के पास आए। महिला टीम ने फाइनल में चीन को 238-234 से हराया, और यह स्कोर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी का रहा।

एथलेटिक्स: सबसे ज्यादा पदक, पर सोना एक

भारत का एथलेटिक्स अभियान 24 पदकों पर रुका, जिनमें 1 स्वर्ण, 9 रजत और 14 कांस्य हैं। हांगझोउ में एथलेटिक्स से 29 पदक आए थे, जिनमें 6 स्वर्ण थे। फिर भी कई उपलब्धियाँ लंबे इंतज़ार के बाद आईं। सावन बरवाल ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ मैराथन में रजत जीता, जो 44 साल बाद भारत का पहला मैराथन पदक है। सर्वेश कुशारे का हाई जंप का रजत 56 साल में इस स्पर्धा का पहला पदक है। सीमा कुमारी का 10,000 मीटर का कांस्य 16 साल बाद आया, और पूजा सिंह ने महिला हाई जंप में 24 साल बाद पदक दिलाया। गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर और 1500 मीटर में रजत तथा 5000 मीटर में कांस्य जीतकर अकेले तीन पदक जुटाए। मुरली श्रीशंकर ने लॉन्ग जंप में रजत जीतकर इस स्पर्धा में एक से ज्यादा पदक जीतने वाले पहले भारतीय का दर्जा पाया।

पहली बार और बाकी खेल

मीराबाई चानू ने 49 किलो में रजत जीतकर वेटलिफ्टिंग में भारत का 28 साल का इंतज़ार खत्म किया। स्क्वैश में अभय सिंह और अनाहत सिंह एकल में मलेशियाई खिलाड़ियों से फाइनल हारकर रजत पर रहे, जबकि मिश्रित डबल्स और महिला टीम ने कांस्य दिलाया। मुक्केबाज़ी से नरेंदर बरवाल, प्रिया और कपिल पोखरिया को कांस्य मिले। डेब्यू करने वाले मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में सुचिका तरियाल ने भारत को पहला पदक दिलाया, और जय मीणा का सॉफ्ट टेनिस कांस्य इस खेल में भारत का पहला एशियाई खेल पदक है। रोइंग के पुरुष डबल स्कल्स में सतनाम सिंह और सलमान खान का कांस्य इस स्पर्धा का भारत का पहला पदक रहा, जबकि वुशु में रोशिबिना देवी ने लगातार तीसरे एशियाई खेलों में पदक जीता। सेलिंग की स्किफ स्पर्धा में मनु फ्रांसिस और प्रिंस नोबल ने रजत जोड़ा।

तुलना और आगे की राह

हांगझोउ में भारत ने सौ से ज्यादा पदक और 28 स्वर्ण जीते थे। इस बार 1 अक्टूबर तक 10 स्वर्ण और आठवाँ स्थान है, इसलिए सीधी तुलना में तस्वीर कमजोर दिखती है। पर खेल 4 अक्टूबर तक चलेंगे, इसलिए अंतिम आँकड़े अभी बदल सकते हैं। फ़िलहाल एथलेटिक्स में सोने की संख्या 6 से घटकर 1 रह गई है, जबकि तीरंदाज़ी, कबड्डी और ट्रैप जैसी स्पर्धाओं ने उसकी भरपाई की है।

logo
NewsCrunch
news-crunch.com