शेखूपुर विधानसभा में राजनीतिक दलों के नए समीकरण

यूपी की शेखूपुर विधानसभा में सांगठनिक सक्रियता और दावेदारों की बढ़ती सक्रियता से बदले चुनावी समीकरण।
शेखूपुर विधानसभा में राजनीतिक दलों के नए समीकरण
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उत्तर प्रदेश की शेखूपुर विधानसभा सीट (संख्या 116) पर आगामी 2027 के चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जहां पारंपरिक रूप से समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच एक बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिलता है। एक तरफ जहां मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के वर्तमान विधायक हिमांशु यादव अपने दादा स्व. बनवारी सिंह यादव की राजनीतिक विरासत और मजबूत यादव-मुस्लिम समीकरण के दम पर जमीन मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी अपने सशक्त सांगठनिक ढांचे, पन्ना प्रमुखों और बूथ स्तर की बैठकों के जरिए इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। क्षेत्र के विकास और सड़कों की स्थिति को लेकर दोनों ही दलों के अपने-अपने तर्क हैं; जहां वर्तमान विधायक का आरोप है कि विकास फंड में कटौती और सरकारी योजनाओं की पाइपलाइन बिछाने के कारण सड़कें प्रभावित हुई हैं, वहीं भाजपा के पूर्व विधायक धर्मेंद्र शाक्य का दावा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में चल रही लोक-कल्याणकारी नीतियों और उनकी खुद की निरंतर सक्रियता के चलते जनता भाजपा के विकास मॉडल के साथ खड़ी है।

वर्ष 2022 के चुनाव में जीत-हार का अंतर बेहद कम (करीब 6,100 वोट) होने के कारण दोनों ही दल इस बार किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। शाक्य और मौर्य (OBC) बाहुल्य इस सीट पर जहां भाजपा इस बार जीत दर्ज करने के प्रयास में जिला प्रशिक्षण वर्ग और संगठनात्मक मजबूती के जरिए अपने अपने कोर मतदाताओं को साधने के भरसक प्रयास कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण के आधार पर मजबूत से मतदाताओं को साधने के काम कर रही है। जबकि, वहीं समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण के सहारे अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की जुगत में है। हालांकि, मतदान से पहले ही कुछ कद्दावर नेताओं की एंट्री ने यहाँ की सियासी हलचल तेज कर दी है। बदायूं सदर के पूर्व विधायक और चेयरमैन आबिद रजा खान बीते कुछ समय से शेखूपुर इलाके में लगातार जनता के बीच एक्टिव हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा खेमे से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव की दावेदारी की चर्चाएं भी जोरों पर हैं।

भाजपा अपने संगठन, नेताओं की सभी अंदरूनी नाराजगी दूर करते हुए इस सीट पर मजबूती से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। इस बार यह सीट भाजपा के पक्ष में जाने की सम्भावना हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या आगामी चुनाव में भी रोटेशन के हिसाब से 'एक बार यादव, एक बार शाक्य' का पुराना सिलसिला जारी रहता है या फिर नए चेहरों की एंट्री और सामाजिक समीकरणों का बदलाव यहां कोई नया राजनीतिक इतिहास लिखता है।

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