वोटर लिस्ट एसएसआर 2027

भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की घोषणा की है।
वोटर लिस्ट एसएसआर 2027
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भारत निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा जैसे राज्य शामिल हैं, जहाँ अगले वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह से अपडेट रखना, नए व युवा मतदाताओं के नाम जोड़ना, अशुद्धियों को सुधारना तथा मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना है। इसके तहत 1 जनवरी 2027 की पात्रता तिथि के अलावा, वर्ष 2027 में 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को 18 वर्ष पूरे करने वाले युवा भी अग्रिम आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे।

आयोग द्वारा जारी आधिकारिक समय-सारणी के अनुसार मतदेय स्थलों का पुनर्गठन और संभाजन 2 नवंबर 2026 तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद 12 नवंबर 2026 को एकीकृत ड्राफ्ट मतदाता सूची का आधिकारिक प्रकाशन किया जाएगा। नागरिक 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक अपने दावों और आपत्तियों को दर्ज करा सकेंगे। प्राप्त सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण 28 दिसंबर 2026 तक कर दिया जाएगा और अंततः 4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होगा।

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रियाओं में स्पष्ट अंतर है। एसएसआर के तहत मौजूदा वोटर लिस्ट में संशोधन किया जाता है, जहाँ दावों, आपत्तियों और रिकॉर्ड की जांच के आधार पर सूची को अपडेट किया जाता है तथा पात्र नए नाम जोड़े जाते हैं व त्रुटियाँ सुधारी जाती हैं। इसके विपरीत, एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट का गहन पुनरीक्षण होता है, जिसमें घर-घर जाकर गणना फॉर्म के माध्यम से सभी मतदाताओं का व्यापक सत्यापन किया जाता है और कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रविष्टियों को सुधारा जाता है।

निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि एक मतदान केंद्र पर सामान्यतः 1,200 से अधिक मतदाता न हों और किसी भी नागरिक को मतदान केंद्र तक पहुँचने के लिए 2 किलोमीटर से ज़्यादा दूरी तय न करनी पड़े। इसके लिए हाईराइज़ इमारतों, रिहायशी कॉलोनियों और शहरी झुग्गी-बस्तियों में विशेष सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके अलावा, वोटर लिस्ट में पते की स्पष्टता के लिए एक समान मानक तय किया गया है, जिसके तहत मकान नंबर, मंजिल नंबर, बिल्डिंग का नाम, अपार्टमेंट नंबर, विंग, वार्ड नंबर, सड़क का नाम, सेक्टर, इलाका, पहचान का स्थान, शहर/गांव, तहसील, जिला, राज्य और पिन कोड जैसी सभी 15 जानकारियों को क्रमानुसार दर्ज किया जाएगा।

पुनरीक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए आयोग ने राज्यों को निर्देश दिया है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी, सहायक ईआरओ और बूथ लेवल अधिकारी जैसे मुख्य अधिकारियों के पद खाली न रखे जाएँ और बिना आयोग की अनुमति के इनका स्थानांतरण न किया जाए। फर्जीवाड़े और अनधिकृत नाम कटौती को रोकने के लिए प्रावधान किया गया है कि यदि किसी बूथ पर 2% से अधिक नाम हटाए जाते हैं या एक ही व्यक्ति 5 से अधिक नाम हटाने की आपत्ति दर्ज कराता है, तो ईआरओ द्वारा स्वयं इसकी जांच की जाएगी। साथ ही, राजनीतिक दलों को दावों और आपत्तियों की साप्ताहिक फिजिकल लिस्ट भी प्रदान की जाएगी।

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