

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव से पहले क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए कांग्रेस ने अपने 38 विधायकों को 10 दिनों के लिए बेंगलुरु शिफ्ट किया है। बाकी बचे हुए विधायक10 जून को बेंगलुरु जा सकते हैं। पार्टी नेतृत्व इस कदम को विधायकों की एकजुटता बनाए रखने और चुनावी रणनीति को सुरक्षित रखने के रूप में देख रहा है।कांग्रेस विधायक बेंगलुरु में पार्टी नेतृत्व की निगरानी में रहेंगे। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के कारण पार्टी को वहां विधायकों की सुरक्षा और समन्वय बनाए रखने में आसानी होगी। माना जा रहा है कि सभी विधायक मतदान से ठीक पहले मध्य प्रदेश लौटेंगे।18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
भाजपा के पास 164 विधायक हैं, इसलिए वह दो राज्यसभा सीटें आसानी से जीत सकती है, जबकि तीसरी सीट के लिए उसे करीब 9 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। भाजपा ने राष्ट्रीय सचिव तरुण चुघ, प्रदेश सचिव रजनीश अग्रवाल और प्रदेश मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने पूर्व सांसद और तेलंगाना की प्रदेश प्रभारी मीनाक्षी नटराजन को प्रत्याशी बनाया है।
कांग्रेस के पास 65 विधायकों में से 62 विधायक वोट देने की स्थिति में हैं, जबकि एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत है। बैंक धोखाधड़ी मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी सदस्यता रद्द हो गई है। विजयपुर उपचुनाव में आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने के आरोपों पर ग्वालियर हाईकोर्ट ने कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर रोक लगा दी है। बीना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के भाजपा के पक्ष में मतदान करने की संभावना जताई जा रही है। भारत आदिवासी पार्टी यानी बीएपी के पास एक विधायक है।