

उत्तर प्रदेश के गोंडा सदर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 296) में 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। वर्ष 2017 और 2022 में लगातार दो बार जीत दर्ज करने वाले मौजूदा भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह (पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के पुत्र) के खिलाफ विपक्षी खेमा नए सिरे से गोलबंदी में लगा है। हालांकि लगातार दो कार्यकाल पूरे होने के कारण स्थानीय स्तर पर विधायक के प्रति स्वाभाविक रूप से कुछ नाराजगी और एंटी-इंकमबेंसी की चर्चाएं भी बनी रहती हैं, लेकिन भाजपा अपने मजबूत संगठन के दम पर स्थिति संभालने में जुटी है।
गोंडा सदर सीट का राजनीतिक भविष्य काफी हद तक इसके बहुकोणीय सामाजिक और जातिगत ढांचे पर निर्भर करता है। कुल लगभग 3.45 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में करीब 72,000 (20-22%) ब्राह्मण मतदाता हैं, जो सबसे बड़ा और निर्णायक वोट बैंक माने जाते हैं। इसके बाद लगभग 55,000 (16-18%) मुस्लिम मतदाता और करीब 55,000 (15-16%) दलित/अनुसूचित जाति (SC) मतदाता हैं, जो विपक्षी रणनीति का मुख्य केंद्र हैं। वहीं लगभग 35,000 (10%) क्षत्रिय (ठाकुर) और लगभग 32,000 (8-9%) यादव मतदाताओं की उपस्थिति के साथ-साथ करीब 50,000 (14-15%) कुर्मी व अन्य ओबीसी तथा 30,000 से अधिक (8-10%) वैश्य, कायस्थ व अन्य जातियां भी चुनावी परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा के प्रतीक भूषण सिंह को 96,528 वोट और सपा के सूरज सिंह को 89,829 वोट मिले थे। महज 6,699 वोटों का यह बारीक अंतर दर्शाता है कि मुस्लिम-यादव समीकरण के साथ कुर्मी, अन्य पिछड़ा वर्ग और ब्राह्मण मतों में थोड़ी सी भी सेंधमारी परिणाम बदल सकती है, जिसके चलते सपा किसी स्थानीय ब्राह्मण या मजबूत ओबीसी चेहरे पर दांव लगाने का विचार कर रही है। सपा की ओर से सूरज सिंह, वकील विवेक पांडे, राजा चतुर्वेदी और अरशद हुसैन दावेदार हैं, जबकि भाजपा में प्रतीक भूषण सिंह के अलावा महेश नारायण तिवारी और महेंद्र नाथ तिवारी के नाम चर्चा में हैं। वहीं बसपा पूर्व विधायक मोहम्मद जलील खान के परिवार के जरिए दलित-मुस्लिम गठजोड़ की तलाश में है और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने मोबीन अहमद को मैदान में उतार दिया है।
वर्तमान माहौल को देखें तो स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकमबेंसी और विपक्षी दलों की तेज लामबंदी के बावजूद भाजपा की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है। गोंडा में डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और बृजभूषण शरण सिंह के व्यापक व्यक्तिगत जनाधार व प्रभावी बूथ मैनेजमेंट के चलते 2027 के चुनाव में भी भाजपा की जीत की संभावनाएं सबसे मजबूत नजर आ रही हैं, हालांकि अंतिम परिणाम 2027 के चुनाव के समय की परिस्थितियों, स्थानीय समीकरणों और जनता के तत्कालीन दृष्टिकोण के अनुरूप ही तय होगा।
गोंडा सदर में आवारा पशुओं की समस्या, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के गड्ढे और बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थायी राहत की कमी मुख्य स्थानीय मुद्दे हैं। हालांकि, राज्य सरकार इन जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रतिबद्धता के साथ प्रयासरत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और सुदृढ़ कानून-व्यवस्था के दम पर गोंडा में जन-कल्याण के कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं।