इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का भाजपा में विलय

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के संयोजक मुकेश गोयल, हेमचंद गोयल और सभी 16 पार्षदों का भाजपा में स्वागत किया।
इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का भाजपा में विलय
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भाजपा में शामिल हुए आईवीपी के 16 पार्षद

दिल्ली नगर निगम की राजनीति में शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को बड़ा बदलाव देखने को मिला। आम आदमी पार्टी से अलग होकर गठित इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का भारतीय जनता पार्टी में औपचारिक विलय हो गया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की मौजूदगी में इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के संयोजक मुकेश गोयल, वरिष्ठ नेता हेमचंद गोयल और पार्टी के सभी 16 पार्षद भाजपा में शामिल हुए। भाजपा नेताओं ने पार्टी का पटका पहनाकर उनका स्वागत किया। इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के पार्षद पिछले एक वर्ष से दिल्ली नगर निगम के कई मुद्दों पर भाजपा का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करते रहे थे। वार्ड समितियों, स्थायी समिति और महापौर चुनाव से जुड़े मामलों में दोनों दलों के बीच राजनीतिक तालमेल भी दिखाई दिया। हालांकि कुछ नगर निगम बैठकों में दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए थे।

आप से बगावत के बाद बनी थी नई पार्टी

इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का गठन मई 2025 में आम आदमी पार्टी के पार्षदों की बगावत के बाद हुआ था। शुरुआत में आम आदमी पार्टी के 15 पार्षदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर नया राजनीतिक संगठन बनाया था। बाद में एक अन्य पार्षद के जुड़ने से नगर निगम में पार्टी की संख्या 16 हो गई। इन पार्षदों ने आम आदमी पार्टी के भीतर मतभेद, अपने वार्डों में विकास कार्यों की धीमी गति और निगम से संबंधित निर्णयों में उचित भागीदारी नहीं मिलने का आरोप लगाया था।

भाजपा नगर निगम में मजबूत हुआ

16 पार्षदों के भाजपा में शामिल होने से नगर निगम में पार्टी की राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक ताकत और अधिक मजबूत हुई है। राजनीतिक रूप से इस घटनाक्रम को वर्ष 2027 के दिल्ली नगर निगम चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा अपने संगठन और वार्ड स्तर के जनाधार को मजबूत करने में जुटी है, जबकि इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के पार्षदों को भाजपा में शामिल होने से अपने राजनीतिक भविष्य और आगामी चुनाव में टिकट की दावेदारी मजबूत होने की उम्मीद है। वहीं, आम आदमी पार्टी के लिए इसे एक और संगठनात्मक झटका माना जा रहा है।

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