

21 साल बाद प्रदेश में सार्वजनिक बस सेवा की शुरुआत
मध्य प्रदेश में करीब 21 साल के लंबे अंतराल के बाद संगठित सार्वजनिक बस परिवहन सेवा की फिर से शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 25 सितंबर को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम से ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ और ‘पीएम ई-बस सेवा’ का शुभारंभ किया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में दोनों नेताओं ने 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में करीब 21 वर्षों बाद सार्वजनिक बस परिवहन सेवा की औपचारिक रूप से वापसी हुई है।
120 इंटरसिटी और 231 इंट्रासिटी बसें
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा’ के तहत शुरुआती चरण में कुल 351 बसों को शामिल किया गया है, जिनमें 120 इंटरसिटी और 231 इंट्रासिटी बसें हैं। इंटरसिटी बसें विभिन्न शहरों के बीच बेहतर परिवहन संपर्क उपलब्ध कराएंगी, जबकि इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेंगी। पहले चरण में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड सहित सात शहरों को इस सेवा से जोड़ा गया है। इनमें इंदौर को सर्वाधिक 145 बसें मिली हैं, जबकि भोपाल को 106, जबलपुर को 67, रीवा को 18, देवास को 10, कटनी को तीन और भिंड को दो बसें आवंटित की गई हैं।
सुरक्षा और तकनीक पर विशेष जोर
नई बस सेवा में यात्री सुरक्षा और तकनीक आधारित निगरानी पर विशेष जोर दिया गया है। बसों में GPS और लाइव लोकेशन ट्रैकिंग के साथ आपात स्थिति के लिए पैनिक बटन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इलेक्ट्रिक और CNG बसों के सुरक्षित एवं सुचारु संचालन के लिए चालकों को तकनीक, वाहन संचालन और सुरक्षा मानकों से संबंधित विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक, आधुनिक और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
2029 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य
राज्य सरकार ने सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में विस्तार करने की योजना बनाई है। इसके तहत वर्ष 2029 तक मध्य प्रदेश में करीब 15 हजार सार्वजनिक बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। योजना के पहले वर्ष में लगभग 1,500 बसें संचालित की जाएंगी, जबकि इसके बाद हर साल करीब 2,500 से 3,000 नई बसें बेड़े में शामिल करने की योजना है। साथ ही, प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को सार्वजनिक बस नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के विस्तार में छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।