

फरीदाबाद की ऐतिहासिक धरती पर इस साल एक बार फिर रंगों और कलाओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। 31 जनवरी से 15 फरवरी तक आयोजित होने वाले 39वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में इस बार उत्तर प्रदेश 'थीम स्टेट' के रूप में अपनी सांस्कृतिक छाप छोड़ेगा। उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक कला और विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश करने के लिए प्रदेश का पर्यटन विभाग पूरी तैयारी कर चुका है।
मेले के दौरान उत्तर प्रदेश के स्टॉलों पर हस्तशिल्प का अद्भुत जादू बिखरा नजर आएगा। फिरोजाबाद की चमकती कांच की चूड़ियां हों या कन्नौज की महकती इत्र परंपरा, हर कोना एक अलग कहानी कहेगा। इसके अलावा आजमगढ़ की प्रसिद्ध ब्लैक पॉटरी और वाराणसी-लखनऊ की बारीक जरी-जरदोजी की कलाकारी पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनेगी। ओडीओपी (एक जनपद एक उत्पाद) योजना के तहत प्रदेश के 40 विशेष स्टॉल भी लगाए जाएंगे, जो स्थानीय कारीगरों को वैश्विक मंच प्रदान करेंगे।
इस वर्ष मेले का स्वरूप तकनीकी और आधुनिक बदलावों के साथ और भी रोचक होने वाला है। मेला परिसर के रास्तों को खुर्जा पॉटरी और मूंज बुनाई जैसे डिजाइनों से सजाया जाएगा, जबकि हर शिल्प की जानकारी के लिए क्यूआर कोड की सुविधा भी मिलेगी। सुबह से शाम तक चलने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ तीन विशेष फैशन शो भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें पारंपरिक वेशभूषा और आधुनिक डिजाइनों का मेल दिखेगा।
पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक झलक भी इस बार मेले की रौनक बढ़ाएगी। असम के कामाख्या मंदिर से लेकर मेघालय की खासी पहाड़ियों तक का अनुभव एक ही परिसर में सिमटा हुआ मिलेगा। लगभग 1300 से अधिक स्टॉलों के साथ यह अंतरराष्ट्रीय मेला न केवल देश बल्कि विदेशी पर्यटकों के लिए भी भारतीय लोक संस्कृति और खानपान को करीब से महसूस करने का एक सुनहरा अवसर साबित होगा।