

देश के आर्थिक और सामाजिक विकास की धुरी माने जाने वाले सहकारिता आंदोलन को एक नई वैश्विक ऊंचाई प्रदान करते हुए केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक विस्तार की घोषणा की है। नई दिल्ली में आयोजित सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वित्तीय समावेशन को सुदूर ग्रामीण अंचलों तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। इफ्को-टोकियो के साथ दोनों प्रकार के बीमा उत्पादों के सफल जमीनी प्रयोगों के आधार पर उठाया जा रहा यह कदम देश के बीमा क्षेत्र में सहकारिता की स्थिति को अत्यधिक सुदृढ़ और प्रतिस्पर्धी बनाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में वर्ष 2021 में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद से इस पूरे क्षेत्र को अभूतपूर्व 'प्राण वायु' मिली है, जो वर्ष 2047 के 'समृद्ध भारत' के संकल्प की एक मजबूत और अटूट आधारशिला सिद्ध होने जा रही है।
बीते पांच वर्षों के स्वर्णिम काल में मंत्रालय ने समस्याओं की सटीक पहचान कर कृषि, डेयरी, बैंकिंग, लॉजिस्टिक्स और मोबिलिटी जैसे कोर सेक्टर्स को ग्राम स्तर तक जोड़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नौ नई विशाल सहकारी समितियों का एक सुदृढ़ और व्यापक नेटवर्क तैयार किया है। देश भर की लगभग 8,58,000 सहकारी समितियों और उनके 32 करोड़ से अधिक सम्मानित सदस्यों का एक अत्याधुनिक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा चुका है, जिसमें समितियों का टर्नओवर, ऑडिट स्टेटस और एबीसी ग्रेडेशन पूरी पारदर्शिता के साथ उपलब्ध है। इसी वर्ष से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली शीर्ष पांच सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष 'रैंकिंग फ्रेमवर्क' का भी प्रभावी शुभारंभ किया गया है। सांगठनिक और प्रशासनिक कुशलता को पेशेवर स्तर पर लाने के लिए बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम में 50 महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं और बैंकिंग व डेयरी क्षेत्र के प्रशिक्षित प्रोफेशनल तैयार करने के लिए गुजरात के आनंद में प्रतिष्ठित 'त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय' की स्थापना कर नियुक्तियों में पूर्ण पारदर्शिता का सूत्रपात किया गया है।
प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के क्रांतिकारी कायाकल्प और सुदृढ़ीकरण के द्वितीय चरण के तहत केंद्र सरकार ने 3,000 करोड़ रूपए की भारी-भरकम लागत से लगभग 50,000 पैक्स को पूरी तरह डिजिटल करते हुए 'ई-पैक्स' के रूप में रूपांतरित कर दिया है, जिससे अब पारदर्शी ई-ऑडिट की राह सुगम हो गई है। वर्तमान में 55,000 से अधिक पैक्स कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से ग्रामीण जनता को 300 से अधिक डिजिटल सेवाएं दे रहे हैं, जबकि हजारों पैक्स किसान समृद्धि केंद्र, जन औषधि केंद्र, खुदरा ईंधन आउटलेट और जलापूर्ति योजनाओं के सुचारू रखरखाव का जिम्मा संभाल रहे हैं। सहकारी बैंकिंग के क्षेत्र में डिजिटल भुगतान, साइबर सुरक्षा और ई-केवाईसी जैसी आधुनिक तकनीकों के समावेशन के परिणामस्वरूप जिला सहकारी बैंकों का कुल व्यवसाय 19.6 लाख करोड़ रूपए की पुरानी सीमा को लांघकर 25 लाख करोड़ रूपए के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है। वहीं, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने इस क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए 70,000 करोड़ रूपए का नया पूंजीगत निवेश किया है।
ग्रामीण मोबिलिटी को नई दिशा देते हुए 'भारत टैक्सी' सेवा का अगले दो वर्षों में देश के 500 से अधिक शहरों और प्रत्येक राज्य में विस्तार किया जाएगा, जिससे वर्तमान में जुड़े 6.37 लाख चालकों और 35.77 लाख ग्राहकों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित होगा। कृषि और उन्नत बीज उत्पादन के क्षेत्र में 'भारत बीज सहकारी समिति' (बीबीएसएसएल) आगामी तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज कंपनी बनने की ओर अग्रसर है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में नई हाइटेक टिश्यू कल्चर सुविधाओं की मजबूत आधारशिला रखी गई है। रासायनिक खादों के विकल्प के रूप में 'गोमय सहकारी समिति' के माध्यम से शुगर और डेयरी क्षेत्र में सौ प्रतिशत 'सर्कुलर इकोनॉमी' लागू कर जैविक खाद और नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्र की इस सस्टेनेबल और आत्मनिर्भर आर्थिक व्यवस्था से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि मोदी सरकार का यह नीतिगत मॉडल किसानों और पशुपालकों को सीधे मुनाफे का हकदार बनाकर आगामी चुनावों में विकास और सुशासन के पक्ष में एक राष्ट्रव्यापी जनसमर्थन की लहर को और अधिक तीव्र करने जा रहा है।