

बिहार में ढांचागत विकास, वित्तीय पारदर्शिता और बाढ़ जैसी आपदाओं के स्थायी समाधान को लेकर केंद्र और राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कार्ययोजना तैयार की है। हाल ही में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में राज्य की लंबित और नई विकास परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का निर्णय लिया गया है। उत्तर बिहार में हर साल तबाही मचाने वाली बाढ़ की समस्या को दूर करने के लिए कोसी नदी पर उच्च बांध के निर्माण हेतु जल्द ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके साथ ही जल शक्ति मंत्रालय को कोसी-मेची लिंक परियोजना के पहले चरण के लिए वित्तीय राशि जारी करने और दूसरे चरण की तकनीकी स्वीकृति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। राज्य में नदियों को आपस में जोड़ने की दिशा में सोन-फल्गु नदी जुड़ाव कार्य भी जल्द शुरू किया जाएगा, जिससे सिंचाई और जल प्रबंधन में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
राज्य में उच्च शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए बिहार सरकार ने विक्रमशिला विश्वविद्यालय के निर्माण के हेतु 219 एकड़ और हाजीपुर में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान के लिए 100 एकड़ भूमि आवंटित कर दी है, जिस पर केंद्रीय मंत्रियों की सहमति के बाद निर्माण कार्य जल्द प्रारंभ होगा। धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए गया के महाबोधि गलियारे तथा विष्णुपद मंदिर गलियारे के विकास कार्य को भी शीघ्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा, बिहार को केंद्र से मिलने वाले वित्तीय हस्तांतरण और अतिरिक्त आर्थिक सहायता को निर्बाध व पारदर्शी बनाने के लिए 30 सितंबर तक सिंगल नोडल एजेंसी और 'स्पर्श' प्रणाली को पूर्ण रूप से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पूरा ढांचा राज्य में नए रोजगार के अवसर पैदा करने, पर्यटन को बढ़ावा देने और आर्थिक सुधारों के जरिए बिहार की समग्र प्रगति को नई रफ्तार देने में अहम भूमिका निभाएगा।