

अयोध्या में राम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर राष्ट्रीय आस्था का प्रतीक बनकर उभरा है। इसी गौरवमयी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 19 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपनी दूसरी अयोध्या यात्रा करेंगी। इस दौरान वह मंदिर के दूसरे तल पर स्थित गर्भगृह में पूर्ण वैदिक विधि-विधान के साथ 'श्रीराम यंत्र' की स्थापना करेंगी। राष्ट्रपति के इस कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा और गरिमा के विशेष प्रबंध किए गए हैं, जहां वह रामलला के दर्शन के साथ-साथ मंदिर की मध्याह्न आरती में भी सम्मिलित होंगी।
यह श्रीराम यंत्र कांची पीठ के शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती द्वारा कराए गए विशेष अनुष्ठान का परिणाम है, जिसे विशेष रूप से राम मंदिर के लिए ही निर्मित किया गया है। लगभग 150 किलो वजन का यह यंत्र मिश्रित धातुओं से बना है और पूरी तरह स्वर्ण मंडित (सोने की परत चढ़ा हुआ) है। इसे कांची पीठ के मूल रामयंत्र की सटीक अनुकृति के रूप में तैयार किया गया है, जिसे लोक कल्याण और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।
यंत्र प्रतिष्ठा के अतिरिक्त, राष्ट्रपति मंदिर परिसर में स्थित 14 पूरक मंदिरों की श्रृंखला में से किसी एक मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण भी करेंगी। हालांकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अभी इस पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की है, लेकिन ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के अनुसार, राष्ट्रपति का यह दौरा मंदिर की धार्मिक मर्यादा और राष्ट्रीय महत्व को नई ऊँचाई देगा।