

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य से गरीबी को जड़ से खत्म करने के लिए 'जीरो पावर्टी अभियान' शुरू करने का निर्णय लिया है। आगामी पंचायत चुनावों से पहले उठाया गया यह कदम यूपी को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को सीधे तौर पर जोड़ा जा रहा है, ताकि विकास की प्रक्रिया में युवाओं की ऊर्जा का लाभ लिया जा सके।
इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के साथ एमओयू (MoU) साइन करेगी। इसके तहत प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान 10 से 15 ग्राम पंचायतों को गोद लेगा। गोद लिए गए गांवों में संस्थान के छात्र 'वालंटियर्स' के रूप में काम करेंगे। यह पहल न केवल निर्धन परिवारों को मुख्यधारा में लाएगी, बल्कि छात्रों में भी सामाजिक उत्तरदायित्व और ग्रामीण परिवेश की समझ विकसित करेगी।
अभियान के दौरान एनएसएस, एनसीसी और एमएसडब्ल्यू (सोशल वर्क) जैसे पाठ्यक्रमों के छात्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। ये छात्र गांवों में जाकर चिन्हित निर्धन परिवारों का सर्वे करेंगे और उनकी जरूरतों का सटीक आकलन करेंगे। छात्रों का मुख्य कार्य इन परिवारों को आजीविका के साधनों, कौशल विकास, रोजगार के अवसरों और सामाजिक सशक्तिकरण की योजनाओं से जोड़ना होगा।
नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार के अनुसार, इस अभियान की सफलता के लिए संस्थानों के स्तर पर 'नोडल शिक्षकों' की तैनाती की जाएगी। ये शिक्षक पूरे अभियान की निगरानी करेंगे और छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे। युवाओं को स्किलिंग, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट लिंकेज से जोड़ने के लिए एक विस्तृत 'माइक्रो-प्लानिंग' तैयार की जाएगी, जिससे पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ मिल सके।
अभियान की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राजधानी लखनऊ से की जाएगी। लखनऊ में इसके सफल परिणामों का विश्लेषण करने के बाद, इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। जिला प्रशासन और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय के लिए जिलाधिकारी स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि जमीनी स्तर पर हो रही प्रगति का मूल्यांकन और आवश्यक सुधार किए जा सकें।