महोबा में जिरकोनियम की खोज: यूपी के औद्योगिक विकास को लगेंगे पंख

बुंदेलखंड में मिला देश का चौथा सबसे बड़ा जिरकोनियम भंडार, निजी कंपनी को मिला खनन का जिम्मा।
महोबा में जिरकोनियम की खोज: यूपी के औद्योगिक विकास को लगेंगे पंख
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उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। महोबा जिले के हरपालपुर-महोबकांत क्षेत्र में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने प्रारंभिक खोज के दौरान बहुमूल्य जिरकोनियम खनिज का एक बड़ा भंडार खोज निकाला है। रासायनिक जांच में इस भंडार को उच्च गुणवत्ता का पाया गया है। इस खोज के साथ ही उत्तर प्रदेश अब ओडिशा, तमिलनाडु और केरल के बाद जिरकोनियम का भंडार पाने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है।

केंद्र सरकार द्वारा 'माइन्स एंड मिनरल्स एक्ट, 1957' में किए गए हालिया संशोधनों के बाद, जिरकोनियम को परमाणु खनिजों की प्रतिबंधित सूची से हटा दिया गया है। इसके बाद केंद्रीय खान मंत्रालय ने पहली बार इसके खनन और अनुसंधान के लिए निजी क्षेत्र को अनुमति दी है। टेंडर प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल की प्रतिष्ठित कंपनी मैसर्स माहेश्वरी माइनिंग को इस खनिज के उत्खनन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव माला श्रीवास्तव के अनुसार, राज्य में मुख्य खनिजों के कुल 13 ब्लॉकों की नीलामी की गई है। इनमें से 10 ब्लॉकों को कम्पोजिट लाइसेंस और 3 ब्लॉकों को खनन पट्टे के लिए स्वीकृत किया गया है, जहाँ जल्द ही खनन कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

जिरकोनियम एक चमकदार, चांदी-धूसर रंग की धातु है, जो अपनी उच्च ऊष्मा प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है। यह न्यूनतम 1855°C तापमान पर पिघलती है। इसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण 'क्रिटिकल एवं स्ट्रेटिजिक मिनरल' माना गया है, जिसका उपयोग थर्मल और न्यूक्लियर पावर प्लांटों में उच्च तापमान को सहने वाले उपकरणों के निर्माण में किया जाता है। इसके अलावा दंत चिकित्सा में दांतों के इलाज और उन्हें मोतियों जैसी चमक देने, कृत्रिम आभूषणों व कीमती रत्नों को तैयार करने तथा विभिन्न उच्च-तकनीकी रासायनिक प्रक्रियाओं और औद्योगिक संयंत्रों में इसका प्रमुखता से इस्तेमाल होता है।

बुंदेलखंड, जो अब तक मुख्य रूप से मौरंग और गिट्टी जैसे उप-खनिजों की आपूर्ति के लिए जाना जाता था, अब देश के औद्योगिक मानचित्र पर एक रणनीतिक खनिज केंद्र के रूप में उभरेगा। इस ऐतिहासिक खोज से उत्तर प्रदेश सरकार को भारी मात्रा में राजस्व प्राप्त होगा। साथ ही, क्षेत्र में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह कदम उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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