

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साथ बैठक कर क्षेत्रीय सुरक्षा, शांति और समुद्री सहयोग को गहरा करने पर चर्चा की। इस दौरान श्रीलंका ने भारत को आश्वासन दिया कि उसकी जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होगा। बैठक के मुख्य बिंदुओं में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, वास्तविक-समय सूचना साझा करना और अवैध तस्करी व आतंकवाद पर रोक लगाना शामिल रहा।
बैठक के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भारत के सुरक्षा हितों का सम्मान करने का भरोसा दिया। चीन द्वारा 2017 में हंबनटोटा बंदरगाह को 99 साल की लीज पर लेने की पृष्ठभूमि में यह आश्वासन भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि श्रीलंका के सबसे नजदीकी पड़ोसी और 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' होने के नाते सहायता प्रदान करना भारत अपना दायित्व मानता है।
द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तीन अहम समझौतों पर दस्तखत किए गए। इसके तहत श्रीलंकाई वायु सेना के एल-70 गन सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा, जिससे वहां की एयर डिफेंस क्षमताएं मजबूत होंगी। इसके अलावा, दोनों देशों के नेशनल कैडेट कोर और नेशनल डिफेंस कॉलेज के बीच भी अकादमिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने के लिए एमओयू पर सहमति बनी।
रक्षामंत्री ने दक्षिण एशिया की प्रगति के लिए स्वतंत्र नौवहन, सुरक्षित समुद्री मार्ग और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन को आवश्यक बताया। उन्होंने अवैध रूप से मछली पकड़ने, नशीले पदार्थों की तस्करी और समुद्री आतंकवाद से निपटने के लिए एक एकीकृत वास्तविक-समयसूचना साझाकरण तंत्र स्थापित करने पर जोर दिया। साथ ही, भारत के 'महासागर' विजन के तहत दोनों देशों के बंदरगाहों को साझा आर्थिक विकास का माध्यम बनाने की बात कही गई।