

न्यूजीलैंड की संसद से मंजूरी मिलने के साथ ही भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर से औपचारिक रूप से लागू होने जा रहा है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक और आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ेगा।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी है कि इस समझौते के बाद अब तक सिरेमिक उत्पाद, कालीन, वाहन और ऑटो पार्ट्स जैसे प्रमुख भारतीय सामानों पर लगने वाला 10 प्रतिशत तक का आयात शुल्क पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, लेदर और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे रोजगार सृजन वाले क्षेत्रों को 250 अरब डॉलर की न्यूजीलैंड अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का बेहतरीन मौका मिलेगा। इसके अलावा, श्रम की कमी से जूझ रहा न्यूजीलैंड मैन्युफैक्चरिंग के बजाय सर्विस सेक्टर पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे भारतीय पेशेवरों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे।
इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा और भारतीय किसानों को सेब व कीवी जैसी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराएगा। दूसरी ओर, भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र के हितों की रक्षा करते हुए दूध, पनीर, प्याज, चना, मटर और मक्का जैसे सभी संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है। वहीं, न्यूजीलैंड से आने वाले एवाकाडो, ब्लूबेरी, कीवी, वाइन, मनुका हनी, ऊन और लकड़ी जैसे विशिष्ट उत्पादों को निर्धारित कोटे के तहत चरणबद्ध तरीके से शुल्क में छूट दी जाएगी, जिससे घरेलू बाजार में ये वस्तुएं अधिक किफायती दरों पर उपलब्ध हो सकेंगी।
वैश्विक व्यापार वार्ताओं को तेज करते हुए भारत और कनाडा के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट के अगले दौर की वार्ता 5 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि आने वाले 90 दिन दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम साबित होंगे।