

जून महीने में दो महत्वपूर्ण एकादशी व्रत पड़ रहे हैं। पहला व्रत परमा एकादशी का है, जो 11 जून को रखा जाएगा। परमा एकादशी अधिक मास में आने के कारण विशेष मानी जाती है। यह एकादशी भगवान विष्णु की पूजा और भक्ति से जुड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होते हैं।
परमा एकादशी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि अधिक मास हर साल नहीं आता। इस कारण इस एकादशी को दुर्लभ और पुण्यदायी माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। कई लोग व्रत रखते हैं, दान-पुण्य करते हैं और धार्मिक कार्यों में भाग लेते हैं।
जून महीने की दूसरी और बड़ी एकादशी निर्जला एकादशी है, जो 25 जून को मनाई जाएगी। निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे कठिन और विशेष फल देने वाली एकादशी माना जाता है। इस व्रत में श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। इसी कारण इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति सालभर की सभी एकादशी का व्रत नहीं रख पाता, वह यदि श्रद्धा से निर्जला एकादशी का व्रत रखे, तो उसे सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
निर्जला एकादशी का संबंध पांडवों में भीमसेन से भी माना जाता है। कथा के अनुसार, भीमसेन भोजन के बिना नहीं रह पाते थे, इसलिए वे सालभर की सभी एकादशी का व्रत नहीं कर पाते थे। तब उन्हें निर्जला एकादशी का व्रत करने की सलाह दी गई। इसी कारण इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव निर्जला एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, दान और सेवा का विशेष महत्व बताया गया है।
निर्जला एकादशी पर जल दान, फल दान, वस्त्र दान और जरूरतमंदों की सहायता करना बहुत शुभ माना जाता है। गर्मी के मौसम में पड़ने के कारण इस दिन जल से जुड़ा दान विशेष महत्व रखता है। कई जगहों पर लोग राहगीरों के लिए प्याऊ लगाते हैं और गरीबों को पानी, शरबत, फल और भोजन सामग्री का वितरण करते हैं। यह व्रत केवल पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि संयम, सेवा और त्याग का भी संदेश देता है।
धार्मिक दृष्टि से निर्जला एकादशी आत्मनियंत्रण और श्रद्धा का पर्व है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करते हैं। व्रत के अगले दिन पारण किया जाता है। इस प्रकार जून महीने की परमा एकादशी और निर्जला एकादशी दोनों ही धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन निर्जला एकादशी को विशेष रूप से बड़ा और पुण्यदायी दिन माना जाता है।