

बिहार के ग्रामीण इलाकों में अधिकार दीदी और सक्षमा दीदी बनकर जीविका से जुड़ी महिलाएं अब कुप्रथाओं को मिटाने के साथ दूसरों को आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं।
राज्य के 38 जिलों के 223 प्रखंडों में संचालित दीदी अधिकार केंद्रों के माध्यम से 1561 अधिकार और सक्षमा दीदियां बाल विवाह, घरेलू हिंसा और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ काम कर रही हैं। इन केंद्रों की मदद से अब तक 2.42 लाख से अधिक महिलाओं और बच्चियों को कानूनी सहायता, सरकारी योजनाओं और रोजगार से जोड़ा जा चुका है। दीदियों ने अपने साहसिक प्रयासों से 10,564 से अधिक बाल विवाह रुकवाकर एक मिसाल पेश की है।
प्रत्येक केंद्र में सात सदस्यों की टीम कार्यरत होती है, जहां अधिकार दीदी परामर्शदाता और सक्षमा दीदी जागरूकता की जिम्मेदारी संभालती हैं। यह टीम महिलाओं को कानूनी मदद देने के साथ ही सखी वन स्टॉप सेंटर और पुलिस प्रशासन से समन्वय बनाकर प्रताड़ित महिलाओं को त्वरित सहायता पहुंचाती है। इन केंद्रों के शानदार नतीजों को देखते हुए राज्य सरकार अब सभी 534 प्रखंडों में प्रखंड कार्यालय परिसरों के भीतर दीदी अधिकार केंद्र स्थापित करने जा रही है, जिनमें से 421 प्रखंडों को मंजूरी भी मिल चुकी है।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू किया गया जीविका अभियान आज बिहार की महिला सशक्तिकरण की एक ऐतिहासिक मिसाल बन चुका है। वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार की एनडीए सरकार 'जीविका' और 'दीदी अधिकार केंद्र' जैसी दूरदर्शी योजनाओं के माध्यम से राज्य की महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।