

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाया गया है। दोनों देशों ने युद्धविराम और शांति बहाली के लिए एक अंतरिम समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अल जजीरा और सीएनएन जैसी प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की यात्रा के दौरान इस ऐतिहासिक दस्तावेज पर सहमति जताई, जिसके बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इस पर हस्ताक्षर किए। भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 5 बजे इस समझौते का आधिकारिक ऐलान होते ही इसे तुरंत प्रभावी कर दिया गया। यह घोषणा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही हो गई, जिससे वैश्विक कूटनीतिक हलकों में सकारात्मक हलचल देखी जा रही है।
इस 14 बिंदुओं वाले अंतरिम समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को पूरी तरह रोकना और एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना है। समझौते के तहत अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और स्थायी संधि पर बातचीत पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलना और अमेरिका द्वारा की गई नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त करना है। आगामी 30 दिनों के भीतर इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल कर दी जाएगी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, लेबनान में भी संघर्ष को समाप्त करने की बात कही गई है, जो पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने के लिए आवश्यक माना जा रहा है।
समझौते के आर्थिक और तकनीकी पहलुओं पर नजर डालें तो इसमें दोनों पक्षों ने व्यावहारिक रुख अपनाया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अंतिम समझौते तक अपने मौजूदा परमाणु कार्यक्रम में कोई ऐसा बदलाव नहीं करेगा जिससे तनाव बढ़े। बदले में, अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने, ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को छूट देने तथा ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों और धनराशि को जारी करने की दिशा में काम करेगा। इसके अतिरिक्त, ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर का एक विशेष फंड बनाने का प्रस्ताव है, हालांकि इसमें अमेरिका का योगदान स्वैच्छिक रखा गया है। इस समझौते की सफलता पर नजर रखने के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र बनाया जाएगा और अंतिम मसौदे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस बीच, चीन सहित कई वैश्विक शक्तियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए सभी पक्षों से युद्धविराम का सम्मान करने की अपील की है।
इस वैश्विक शांति पहल के बीच, भारत और अमेरिका भी एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं। फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में इस पर सकारात्मक चर्चा हुई, जिसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने साझा किया कि दोनों देश इस व्यापारिक समझौते के अंतिम चरण में हैं। इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने और लंबे संघर्ष को थामने के लिए अमेरिकी नेतृत्व के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और निर्बाध समुद्री व्यापार के लिए होर्मुज स्ट्रेट का खुला रहना और समुद्री मार्गों में आवाजाही की स्वतंत्रता अनिवार्य है। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार क्षेत्र में कार्यरत लाखों भारतीय नाविकों और पोतों की सुरक्षा का संवेदनशील मुद्दा भी मजबूती से उठाया, जिसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और द्विपक्षीय सहयोग के लिहाज से एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।