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सेना की नई अंतरिक्ष कमान

भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक युद्ध शैली के अनुरूप ढालते हुए त्रि-सेवा कमान का गठन अंतिम चरण में पहुंचा चुका है।

युद्ध के तेजी से बदलते वैश्विक स्वरूप और अंतरिक्ष में मंडराते नए खतरों के मद्देनजर भारत ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की है। इसी दिशा में देश की पहली त्रि-सेवा 'अंतरिक्ष कमान' के गठन की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में है। यह कमान थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों की युद्ध क्षमताओं को एक साझा मंच पर लाएगी। तीनों सेनाओं के बीच इस विषय पर उच्च स्तरीय विमर्श पूरा हो चुका है और सरकार जल्द ही एक अंतरिम अंतरिक्ष कमान का ऐलान करने जा रही है, जिसे बाद में आवश्यक सुधारों के साथ स्थायी रूप दिया जाएगा।

अंतरिक्ष कमान की संगठनात्मक संरचना को बेहद संतुलित बनाया गया है, जिसकी मुख्य कमान थल सेना के हाथों में रहेगी। थल सेना के लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी इस पूरी कमान का नेतृत्व करेंगे। उनके अधीन मेजर जनरल स्तर के पांच सैन्य अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। बलों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के लिए इस कमान दल में मेजर जनरल के समकक्ष स्तर के वायु सेना के तीन और नौसेना के दो वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। इसके अलावा बेंगलुरु स्थित मौजूदा रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी का भी इस नई कमान में विलय किया जाएगा।

वैश्विक परिदृश्य को देखें तो यह पहल भारत को दुनिया के उन चुनिंदा शक्तिशाली देशों की कतार में मजबूती से खड़ा करती है जिनके पास समर्पित स्पेस कमांड है। वर्तमान में अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस, जर्मनी, जापान, इटली, ऑस्ट्रेलिया और ईरान जैसे देशों के पास अपनी अंतरिक्ष कमान संचालित है, जबकि ब्रिटेन ने भी हाल ही में इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर के लगभग अस्सी देश नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम चला रहे हैं और आने वाले समय में वे भी अपनी रक्षा जरूरतों के मद्देनजर इसका सैन्य ढांचा तैयार कर सकते हैं।

इस नई अंतरिक्ष कमान के कंधों पर भारत की अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा से लेकर सामरिक खुफिया जानकारी जुटाने तक की बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। इनमें मुख्य रूप से उपग्रहों के जरिए सीमाओं की रियल-टाइम निगरानी, सुरक्षित संचार व नौवहन सेवाएं सुनिश्चित करना और अपने उपग्रहों की रक्षा करना शामिल है। इसके अलावा यह कमान दुश्मन देशों के सैटेलाइट्स की गतिविधियों पर नजर रखेगी, उनके खुफिया सिग्नलों को रोकेगी और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें नष्ट करने का सामर्थ्य रखेगी। वर्तमान में तीनों सेनाओं में अलग-अलग चल रही ये सभी यूनिटें अब एकीकृत होकर इसी कमान के अधीन काम करेंगी।

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