भारत (India) अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आगामी दशकों के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। इनमें मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाना और वर्ष 2047 तक चंद्रमा पर स्थायी क्रू स्टेशन बनाना शामिल है।
मंगल पर इंसानी बस्ती का सपना
इसरो ने स्पष्ट किया है कि आने वाले 40 वर्षों में मंगल पर इंसानों के लिए रहने योग्य आधार तैयार किया जाएगा। इसके लिए वैज्ञानिक और तकनीकी तैयारी पर ज़ोर दिया जा रहा है। यह योजना केवल अंतरिक्ष अन्वेषण तक सीमित नहीं, बल्कि दीर्घकालिक मानवीय बसावट की दिशा में पहला बड़ा प्रयास होगी।
चाँद पर क्रू स्टेशन
इसी के साथ चाँद पर 2047 तक एक क्रू स्टेशन स्थापित करने का भी लक्ष्य है। यह स्टेशन अंतरिक्ष यात्रियों के लिए शोध और परीक्षण का प्रमुख केंद्र होगा। चंद्रमा पर यह प्रयास न केवल भारत की वैज्ञानिक क्षमता का प्रमाण होगा, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग का नया अध्याय भी खोलेगा।
एलपीएसटीवी की क्षमता
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने घोषणा की है कि वह ऐसा नया लॉन्च व्हीकल तैयार कर रहा है जो 80 टन तक पेलोड ले जाने में सक्षम होगा। इस क्षमता से भारत (India) की भविष्य की अंतरिक्ष यात्राएं अधिक सुरक्षित और प्रभावी बन सकेंगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि इतनी बड़ी वहन क्षमता वाला प्रक्षेपण यान न केवल चंद्रमा (Moon) और मंगल जैसे मिशनों को गति देगा, बल्कि अंतरिक्ष अनुसंधान के नए आयाम भी खोलेगा।
हाट-बाज़ार से अंतरिक्ष तक
प्रधानमंत्रीके विकसित भारत के लक्ष्य से प्रेरित इस योजना में भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति बनाने की परिकल्पना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल और चाँद पर स्थायी उपस्थिति पित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए ऊर्जा , संसाधन और शोध के नए रास्ते खोलेगा।